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20 साल सेवा के बाद भी शिक्षक ‘सरकारी कर्मचारी’ नहीं! MP में पेंशन विवाद पर उमंग सिंघार बोले “बीजेपी सिर्फ इस्तेमाल करना जानती है”

Written by:Shruty Kushwaha
Published:
स्कूल शिक्षा विभाग के हलफनामे के बाद मध्यप्रदेश के लाखों शिक्षकों की पुरानी पेंशन और सेवा अवधि को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। कांग्रेस ने इसे शिक्षकों के अधिकारों के साथ अन्याय बताते हुए सरकार को घेरा है। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने वर्षों तक शिक्षकों से सेवाएं लेने के बाद अब अदालत में उन्हें सरकारी कर्मचारी मानने से इनकार कर दिया है।
20 साल सेवा के बाद भी शिक्षक ‘सरकारी कर्मचारी’ नहीं! MP में पेंशन विवाद पर उमंग सिंघार बोले “बीजेपी सिर्फ इस्तेमाल करना जानती है”

Umang Singhar

मध्यप्रदेश में करीब तीन लाख शिक्षकों की पेंशन और वरिष्ठता को लेकर उठे विवाद के बीच कांग्रेस प्रदेश सरकार पर हमलावर है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिन शिक्षकों से दो दशक तक लगातार काम लिया गया, आज सरकार अदालत में उन्हें अपना कर्मचारी मानने से ही इनकार कर रही है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने वर्षों तक बच्चों को पढ़ाने, चुनाव ड्यूटी निभाने और सरकारी योजनाओं को जमीन पर लागू करने का काम किया, लेकिन अब जब पेंशन और सेवा लाभ देने की बात आई तो सरकार जिम्मेदारी से पीछे हट रही है। कांग्रेस नेता ने इसे सिर्फ प्रशासनिक मामला नहीं बल्कि शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया।

क्या है पूरा विवाद

ये मामला उन शिक्षाकर्मियों, संविदा शिक्षकों और अध्यापकों से जुड़ा है जिनकी नियुक्तियां 1997, 1998, 2001 और 2005 में पंचायत एवं नगरीय निकायों के माध्यम से हुई थीं। जानकारी के अनुसार, जबलपुर हाईकोर्ट में दायर एक हलफनामे में स्कूल शिक्षा विभाग ने कहा है कि वर्ष 2018 से पहले ये शिक्षक राज्य सरकार के कर्मचारी नहीं थे बल्कि पंचायतों और निकायों के अधीन कार्यरत थे।

सरकार का कहना है कि 73वें और 74वें संविधान संशोधन के बाद स्कूलों का प्रशासनिक नियंत्रण स्थानीय निकायों को सौंपा गया था। बाद में वर्ष 2018 में नया शिक्षक संवर्ग बनाकर इन कर्मचारियों को नई नियुक्ति दी गई। इसी आधार पर विभाग ने अदालत में कहा कि उनकी नियमित सरकारी सेवा 2018 से मानी जाएगी। इस दलील के चलते 1997 से 2018 तक की सेवा अवधि को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। शिक्षकों को आशंका है कि यदि सरकार का पक्ष स्वीकार हुआ तो पुरानी पेंशन, वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभों पर असर पड़ सकता है।

उमंग सिंघार ने सरकार पर लगाए आरोप

इस मुद्दे पर उमंग सिंघार ने बीजेपी पर शिक्षकों के साथ अन्याय का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि 20 साल तक शिक्षकों से पूरे काम लिए गए, लेकिन जब पेंशन और अधिकारों की बारी आई तो सरकार कोर्ट में कह रही है कि “ये हमारे शिक्षक नहीं हैं”। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सवाल करते हुए कहा कि क्या 20 साल तक सेवा देने के बाद भी शिक्षक सरकार के अपने कर्मचारी नहीं माने जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार शिक्षकों से काम तो लेती रही, लेकिन अब उनके अधिकारों और सम्मान को लेकर संवेदनशील नहीं दिख रही भाजपा सरकार सिर्फ इस्तेमाल करना जानती है, सम्मान देना नहीं।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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