मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों के स्वैच्छिक तबादलों के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया आज से शुरू हो रही है। शिक्षक 19 से 23 जून तक एजुकेशन पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन चॉइस फिलिंग और आवेदन कर सकेंगे। प्राप्त आवेदनों की जांच और प्रोसेसिंग का काम 24 से 26 जून तक चलेगा।
इसके बाद स्वीकृत तबादलों के ऑनलाइन आदेश 28 से 30 जून के बीच जारी किए जाएंगे। ट्रांसफर होने के बाद शिक्षकों को 30 जून से 6 जुलाई तक पुराने स्कूल से कार्यमुक्त होकर नए स्कूल में जॉइनिंग लेनी होगी। ध्यान रहे ऑनलाइन फॉर्म भरते समय बिना हस्ताक्षरित ड्राफ्ट अपलोड करने वाले शिक्षकों के आवेदन सीधे रिजेक्ट कर दिए जाएंगे।
गंभीर बीमारी, विधवा, तलाकशुदा या परित्यक्ता महिलाओं को गृह जिले या सुविधाजनक स्थान पर पदस्थापना में प्राथमिकता मिलेगी। बता दें कि पहले ये प्रक्रिया 18 जून से शुरू होनी थी लेकिन रिक्त पदों की सूची पोर्टल पर समय से अपडेट न होने के कारण एक दिन की देरी हुई।
भले ही तबादलों के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो रही है लेकिन शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए लागू नई तबादला नीति की नई शर्तों और नियमों को लेकर प्रदेशभर के शिक्षकों में नाराजगी है। नई पॉलिसी के तहत, उन्हीं शिक्षकों के तबादले होंगे, जिनकी करीब 90 फीसदी से ज्यादा ई-अटेंडेंस है। जिन शिक्षकों की ई-अटेंडेंस इससे कम है उन्हें पॉलिसी से बाहर रखा जाएगा।
नई नीति के तहत केवल वही शिक्षक स्वैच्छिक स्थानांतरण के पात्र होंगे, जिनकी जनवरी से मार्च 2026 के दौरान ऑनलाइन ई-अटेंडेंस कम से कम 90% दर्ज रही है। इसके अलावा स्वैच्छिक तबादला लेने वाले शिक्षकों को पसंदीदा स्कूल तो मिल जाएगा, लेकिन उनकी पुरानी वरिष्ठता समाप्त हो जाएगी। नई वरिष्ठता सूची में उनका नाम सबसे नीचे दर्ज होगा, जिससे भविष्य में पदोन्नति (प्रमोशन) पर असर पड़ सकता है।
एक बार स्वैच्छिक स्थानांतरण का लाभ लेने के बाद अगले 3 शैक्षणिक सत्रों तक सामान्य परिस्थितियों में दोबारा ट्रांसफर के आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। जनगणना ड्यूटी वाले शिक्षकों के तबादले नहीं किए जाएंगे। प्रदेश में करीब 80 हजार शिक्षक वर्तमान में जनगणना कार्य में संलग्न हैं। यदि किसी का प्रशासनिक तबादला आदेश पहले जारी भी हो चुका है, तो ड्यूटी अवधि के दौरान वह स्वतः निरस्त माना जाएगा।
शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग से ई-अटेंडेंस, जनगणना ड्यूटी तथा न्यूनतम सेवा अवधि जैसी शर्तों में व्यावहारिक छूट देने की मांग की है ताकी पारिवारिक और स्वास्थ्य कारणों से लंबे समय से तबादले का इंतजार कर रहे हजारों शिक्षकों को लाभ मिल सके।






