नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचलों से हो रहे पलायन को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है और बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार रोजगार, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन की तलाश में अपने ही प्रदेश से पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने इसे आदिवासी समाज के सम्मान और अस्तित्व से जुड़ा गहरा मानवीय संकट बताया है।
उन्होंने कहा कि जो लोग सदियों से जल, जंगल और जमीन से जुड़े रहे हैं आज वही लोग अपने गांव और खेत छोड़कर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने के लिए विवश हैं। कांग्रेस नेता ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से कहा कि यह सिर्फ आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज के सम्मान, पहचान और अस्तित्व से जुड़ा गंभीर मानवीय संकट बनता जा रहा है।
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आदिवासियों के पलायन के मुद्दे पर उमंग सिंघार का सरकार पर हमला
मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में पलायन के संकट के लिए उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से सत्ता में बैठी भाजपा सरकार दलित और आदिवासी समाज के मुद्दों पर सिर्फ घोषणाएं और प्रचार करती रही है। उन्होंने कहा कि “आदिवासी गौरव” के नाम पर कार्यक्रम जरूर किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आदिवासी परिवारों को रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अपने ही प्रदेश से पलायन करना पड़ रहा है।
सरकारी नीतियों की विफलता का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि आदिवासी क्षेत्रों में न स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार उपलब्ध है, न बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं हैं और न ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था। उनका कहना है कि जब किसी प्रदेश के मूल निवासी ही अपनी मिट्टी छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएं तो यह वहां की सरकार की नीतियों की विफलता का स्पष्ट प्रमाण है। बता दें कि मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों से बड़ी संख्या में मजदूर हर साल काम की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करते हैं। इसे लेकर अब कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर आदिवासियों की उपेक्षा का आरोप लगाया है।