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MP जल संसाधन विभाग में “परसेंटेज राज” और फिक्स टेंडर मॉडल का आरोप, कांग्रेस ने की 2023-24 के टेंडरों की जांच की मांग

Written by:Shruty Kushwaha
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वरिष्ठ कांग्रेस नेता मुकेश नायक ने कहा है कि बड़े सिंचाई टेंडरों में पहले से प्रतिशत तय किए जाते हैं और चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाया जाता है। उनका कहना है कि पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से बड़े टेंडर नहीं लगने से प्रदेश में सिंचाई परियोजनाएं ठप पड़ी हैं।
MP जल संसाधन विभाग में “परसेंटेज राज” और फिक्स टेंडर मॉडल का आरोप, कांग्रेस ने की 2023-24 के टेंडरों की जांच की मांग

Congress Press Conference

कांग्रेस ने मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग में कथित “परसेंटेज राज” और फिक्स टेंडर मॉडल को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक और प्रदेश प्रवक्ता राहुल राज ने एक पत्रकार वार्ता में विभाग में अनियमितताओं, कमीशनराज और टेंडर प्रक्रिया में साठगांठ का आरोप लगाया।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाए हैं कि सिंचाई परियोजनाओं के नाम पर बड़े स्तर पर कमीशन का खेल चल रहा है और पिछले डेढ़ वर्ष से बड़े टेंडर नहीं लगने से परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि ‘कांग्रेस द्वारा अध्ययन किए गए आधिकारिक BOQ Comparative Chart एवं निविदा दस्तावेजों से जो तथ्य सामने आए हैं, वे अत्यंत चिंताजनक हैं।’

बड़े टेंडरों में “परसेंटेज मॉडल” का आरोप

वरिष्ठ कांग्रेस नेता मुकेश नायक ने आरोप लगाया है कि जल संसाधन विभाग में 300 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडरों में पहले से प्रतिशत तय करने की व्यवस्था बनाई जाती है। उन्होंने कहा कि प्रभावशाली बिचौलियों के माध्यम से विभागीय और उच्च स्तर पर तय कमीशन के आधार पर टेंडर प्रक्रिया होती है। साथ ही ये आरोप भी लगाया कि यदि कथित प्रतिशत का भुगतान नहीं होता तो टेंडर प्रक्रिया में अड़चन डाल दी जाती है।

कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि क्या इसी कारण पिछले डेढ़ वर्ष से जल संसाधन विभाग में बड़े नए टेंडर नहीं निकाले गए। उन्होंने यह भी पूछा कि नौशाद नामक व्यक्ति की विभागीय निर्णयों में कथित भूमिका क्या है, जबकि वह सरकारी कर्मचारी नहीं है। कांग्रेस ने जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट से उसके संबंधों पर भी स्पष्टीकरण मांगा है।

कांग्रेस ने कंपनियों की भूमिका पर उठाए सवाल

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कई जिलों में सिंचाई और लिफ्ट इरिगेशन परियोजनाओं के टेंडरों में बार-बार वही कंपनियां बोली लगाती दिखाई देती हैं। मुकेश नायक ने कहा कि अनेक जिलों जैसे खरगोन, अलीराजपुर, झाबुआ, डिंडोरी, बड़वानी, हरदा, रीवा, मंदसौर, सीहोर, मंडला, खंडवा आदि  के बड़े सिंचाई एवं लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट्स में निम्न कंपनियां लगातार साथ-साथ बोली लगाती दिखाई देती हैं। ये कंपनिया हैं:
LCC Projects Pvt. Ltd.
Mantena Infrasol Pvt. Ltd.
Navayuga Engineering Company Ltd.
Gaja Engineering Pvt. Ltd.
Hoisto Structures and Equipment Pvt. Ltd.
Megha Engineering & Infrastructures Ltd.
Larsen & Toubro Ltd.
Laxmi Civil Engineering Services Pvt. Ltd.
Phaloudi Constructions & Infrastructure Pvt. Ltd.
Vijay Kumar Mishra Construction Pvt. Ltd.
Dineshchandra R Agrawal Infracon Pvt. Ltd.
Dilips Buildcon Ltd.(DBL-VKMCPL JV)

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कई टेंडरों में इन्हीं कंपनियों के बीच L1, L2 और L3 का क्रम बदलता रहता है, जिससे वास्तविक प्रतिस्पर्धा पर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में केवल दो या तीन कंपनियां ही टेंडर प्रक्रिया में शामिल होती हैं, जिससे पूर्व-निर्धारित परिणाम का संदेह पैदा होता है।

फर्जी बिलिंग और गुणवत्ता से समझौते के आरोप

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कुछ परियोजनाओं में साइट पर सामग्री पहुंचने से पहले ही भुगतान निकाल लिए गए। DI पाइप की जगह HDPE पाइप लगाने की शिकायतें भी पार्टी के संज्ञान में आई हैं। आरोप है कि L1 घोषित होने के बाद भुगतान में कथित तौर पर 2 प्रतिशत तक की अनिवार्य कटौती की जाती है।

सिंचाई परियोजनाएं प्रभावित होने का दावा

मुकेश नायक ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बजट में सिंचाई रकबा बढ़ाने और कृषि वर्ष घोषित करने का दावा किया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि बड़े टेंडर लंबे समय से नहीं निकले हैं। उनका कहना था कि यदि टेंडर प्रक्रिया ही ठप रहेगी तो सिंचाई परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ेंगी और किसानों को लाभ नहीं मिल पाएगा।

राहुल राज ने टेंडर प्रक्रिया रुकने पर सवाल किए

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता राहुल राज ने आज पत्रकार वार्ता में साल 2023-24 के टेंडरों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज सार्वजनिक किए। उन्होंने आरोप लगाया कि डेढ़ वर्ष से टेंडर प्रक्रिया पर लगी रोक से पहले भी चुनिंदा कंपनियों के बीच सुनियोजित नेक्सस बनाकर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।

उन्होंने कहा कि कई परियोजनाओं में वही कंपनियां अलग-अलग भूमिकाओं में टेंडर डालती रहीं और कुछ आपस में जुड़ी कंपनियां अलग-अलग नामों से बोली लगाती रहीं। उन्होंने मनीष गुप्ता और जगदीश गुप्ता से जुड़े कथित नेटवर्क पर भी सवाल उठाए।

जांच की मांग

कांग्रेस ने गुजराती कॉलोनी और अरेरा कॉलोनी स्थित कुछ परिसरों की जांच की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इन स्थानों से टेंडर साठगांठ के संकेत मिलते हैं और स्वतंत्र फोरेंसिक जांच से मनी ट्रेल सामने आ सकती है। इसी के साथ कांग्रेस ने 2023-24 के सभी टेंडरों की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच, दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच, संदिग्ध परिसरों की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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