चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ के चलते मंगलवार, 20 अक्टूबर को भी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, नर्मदापुरम और सागर संभाग के 25 जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। इस दौरान हवा की गति 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है। हालांकि जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग के कई जिलों में दिन में अच्छी धूप निकलने का अनुमान है।
सोमवार, 20 अक्टूबर को सीहोर, इंदौर और सागर में बारिश हुई। गुना, शाजापुर, मंदसौर, उज्जैन, आगर-मालवा, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल और छिंदवाड़ा में भी मौसम बदला रहा। छिंदवाड़ा, कटनी आलीराजपुर, गुना और नीमच में न्यूनतम तापमान 17-18 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया। वहीं खंडवा, उज्जैन, खरगोन, रतलाम, राजगढ़ और रायसेन में अधिकतम तापमान 35 डिग्री से ऊपर रहा।
मौसम विभाग ने आज विजयादशमी पर भोपाल, इंदौर, उज्जैन, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़, रायसेन, सागर, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में बारिश की संभावना जताई है। 22 और 23 अक्टूबर को भी पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। 23 अक्टूबर के बाद मौसम साफ होने लगेगा। अक्टूबर अंत से रात के तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी और ठंड का असर भी तेज होने लगेगा। इधर, बारिश की संभावनाओं को देखते हुए कई जिलों में रावण के पुतलों को ढंक दिया गया है।
22-23 अक्टूबर तक रहेगा बारिश का प्रभाव
मौसम विज्ञान केंद्र, भोपाल के मुताबिक, कम दबाव के क्षेत्र के उसी क्षेत्र में एक डिप्रेशन (अवदाब) में तीव्र होने की संभावना है। इसके शुरुआती 2-3 दिनों के दौरान पूर्व-उत्तर-पूर्व की ओर बढ़कर उत्तर-पश्चिम की मुड़कर समुद्रतल तट की ओर बढ़ने की संभावना है। ट्रफ माध्य समुद्र तल से 3.1 किमी की ऊंचाई पर दक्षिण-पश्चिम राजस्थान से उत्तर-पूर्व अरब सागर तक बना है।
इसके अलावा ऊपरी हवा का चक्रवातीय परिसंचरण माध्य समुद्र तल से 1.5 किमी की ऊंचाई तक दक्षिण राजस्थान और उसके आसपास के क्षेत्रों के ऊपर बना हुआ है। साथ ही एक ऊपरी हवा का चक्रवातीय परिसंचरण माध्य समुद्र तल से 1.5 किमी की ऊँचाई उत्तर-पश्चिम यूपी और उसके आसपास के क्षेत्रों के ऊपर बना हुआ है। इन सभी मौसम प्रणालियों के प्रभाव से भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, नर्मदापुरम और सागर संभाग में मौसम बदला हुआ है, फिलहाल 22-23 अक्टूबर तक बादल-बारिश की स्थिति बनी रह सकती है। हालांकि पिछले 10 सालों का आंकड़ां देखें तो अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंडक का मिला-जुला असर देखने को मिलता है। इस बार भी यही स्थिति बनी हुई है।
बता दें कि इस बार मानसून 24 जून से 3 अक्टूबर 2026 यानि 100 दिन सक्रिय रहा। इस दौरान 908.4 मिलीमीटर यानी 35.8 इंच (95.9%) बारिश दर्ज हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिलीमीटर ) होनी चाहिए थी। पूरे मानसूनी सीजन में प्रदेश में करीब 4% या 1.5 इंच बारिश कम हुई। पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा पानी गिरा, लेकिन पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% कम बारिश हुई। आलीराजपुर बारिश के मामले में सबसे पीछे रहा। निवाड़ी और मऊगंज में सामान्य से 150% से ज्यादा बारिश दर्ज हुई।







