पुलिस मुख्यालय भोपाल के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक/पुलिस महानिरीक्षक तथा विशेष सशस्त्र बल (विसबल) जोनों की दो दिवसीय त्रैमासिक समीक्षा बैठक रविवार को संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने की।
DGP ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश
बैठक के समापन अवसर पर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने प्रदेश में बेहतर पुलिसिंग, प्रशासनिक दक्षता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उच्च पद का कार्यवाहक प्रभार प्रदान किया जाना है, उनके प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण कर दायित्व सौंपे जाएं, जिससे प्रशासनिक कार्यों में गति आए और कर्मचारियों का मनोबल बढ़े।
लंबित न्यायालयीन प्रकरणों की नियमित, प्रभावी समीक्षा करने के निर्देश
डीजीपी कैलाश मकवाणा ने सभी इकाइयों को लंबित न्यायालयीन प्रकरणों की नियमित एवं प्रभावी समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय एवं अन्य न्यायालयों में लंबित प्रकरणों, अवमानना याचिकाओं, सेवा संबंधी मामलों, रिट याचिकाओं तथा स्थगन आदेशों की स्थिति की ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सतत निगरानी की जाए तथा समय-सीमा में जवाब दावा एवं आवश्यक अभिमत प्रस्तुत कर प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने पुलिस विभाग में ई-ऑफिस प्रणाली के शत-प्रतिशत उपयोग पर विशेष बल देते हुए निर्देशित किया कि सभी कार्यालयीन कार्यों को अधिकतम रूप से डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाए। स्थानांतरित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से भारमुक्त किए जाने की प्रक्रिया भी समयबद्ध रूप से पूर्ण की जाए।
उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों को पुरस्कृत करने का निर्देश
डीजीपी ने विभागीय जांच प्रकरणों के त्वरित निराकरण, उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पुरस्कृत करने तथा उनके नाम विभिन्न राज्य एवं राष्ट्रीय पुरस्कारों, विशेषकर के.एफ. रुस्तमजी पुरस्कार हेतु प्रस्तावित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों को पहचान और सम्मान मिलना आवश्यक है, जिससे पुलिस बल में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा एवं कार्य संस्कृति विकसित हो सके। उन्होंने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी मामलों की व्यक्तिगत स्तर पर समीक्षा कर उनका प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करें।
सीसीटीवी नेटवर्क, सेफगार्ड योजना एवं संसाधन प्रबंधन पर विशेष जोर
पुलिस महानिदेशक ने निर्देशित किया कि प्रदेश में स्थापित सभी सीसीटीवी कैमरे सदैव चालू एवं कार्यशील स्थिति में रहें तथा उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सेफ सिटी, टेलीकॉम तथा थाना सीसीटीवी योजनाओं का प्रभावी संचालन अपराध नियंत्रण एवं अपराधियों की पहचान में किया जाए। नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज एवं पांढुर्णा में भी सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार प्राथमिकता से किया जाए। सेफगार्ड योजना के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित लगभग एक लाख कैमरों का नेटवर्क विकसित किया जाए, जिसका उपयोग कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, यातायात प्रबंधन एवं अपराध नियंत्रण सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जा सके।
अगले तीन वर्षों में “ड्रग फ्री मध्यप्रदेश” का लक्ष्य
डीजीपी कैलाश मकवाणा ने कहा कि जिस प्रकार प्रदेश नक्सल समस्या से मुक्त हुआ है, उसी प्रकार अगले तीन वर्षों में “ड्रग फ्री मध्यप्रदेश” का लक्ष्य प्राप्त करना है। यह अभियान केंद्र सरकार एवं केंद्रीय गृह मंत्री एवं मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं के अनुरूप संचालित किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि 15 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक स्तर पर “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान संचालित किया जाए। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को चरणबद्ध रूप से “ड्रग फ्री जोन” बनाने के निर्देश दिए।





