MP News: अब बिजली खरीद समझौतों के लिए कैबिनेट मंजूरी जरूरी, अब तक बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा अनुमोदित किए जाते थे

मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) के बोर्ड का यह प्रस्ताव ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के समक्ष रखा जाएगा। उसके बाद मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री की अनुमति प्राप्त करने के लिए भेजा जाएगा।
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अब बिजली खरीद समझौतों के लिए मध्य प्रदेश कैबिनेट की मंजूरी लेना अनिवार्य होगी। अब तक समझौते कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा अनुमोदित किए जाते थे, लेकिन अब सभी नए समझौतों के लिए कैबिनेट स्तर की मंजूरी प्राप्त करने का प्रस्ताव किया गया है।

दरअसल, ​मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) के बोर्ड ने यह निर्णय लिया है कि भविष्य में होने वाले सभी दीर्घकालीन (Long-term) और मध्यकालीन (Medium-term) बिजली खरीद समझौते (PPA) और बिजली आपूर्ति समझौते (PSA) अब सीधे बोर्ड स्तर पर फाइनल नहीं होंगे। इन्हें लागू करने से पहले मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली राज्य कैबिनेट से औपचारिक मंजूरी लेनी होगी।

इस नीति में बदलाव का प्रमुख कारण यह है कि दीर्घकालीन बिजली खरीद समझौते अत्यंत महत्वपूर्ण वित्तीय प्रतिबद्धताएं हैं, जो वर्षों तक सरकार को प्रभावित करती हैं। इसलिए आवश्यक है कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ये समझौते राज्य के हित में हो और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करें। कैबिनेट की निगरानी से इसमें पारदर्शिता बढ़ेगी।इसके अलावा वर्तमान में नई तकनीकी के कारण बायोमास, सोलर बेट्री स्टोरेज, पम्प हाउड्रो स्टोरेज, न्यूक्लियर एनर्जी जैसी कई नई तकनीकों से उत्पादित होने वाली ऊर्जा के अनुबंधों के प्रस्ताव आ रहे हैं, इस बारे में राज्य शासन और वित्त विभाग के परामर्श की आवश्यकता महसूस हो रही है।

अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई ने बताया कि बोर्ड ने गहन विचार-विमर्श के बाद वर्तमान ऊर्जा की उपलब्धता और राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं की वर्तमान एवं भविष्य की व्यवस्था को देखते हुए यह निर्णय लिया है। बोर्ड का यह प्रस्ताव ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के समक्ष रखा जाएगा। उसके बाद मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री की अनुमति प्राप्त करने के लिए भेजा जाएगा। वर्तमान में सौर, पवन, थर्मल और अन्य नवकरणीय ऊर्जा स्रोतों से राज्य की बिजली की जरूरतें पूरी हो रही हैं। यह निर्णय राज्य की बिजली आपूर्ति को स्थिर रखने और भविष्य के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धा को दर्शाता है। सरकार का यह कदम राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर शासन को बढ़ावा देगा। इससे सभी नई बिजली खरीद योजनाएं अधिक सुविचारित और राज्य की ऊर्जा नीति के अनुरूप होगी।

बता दें कि ऊर्जा विभाग और राज्य सरकार पहले से मौजूद लगभग 1,795 छोटे, बड़े एवं लघु तथा दीर्घ अवधि के बिजली खरीद समझौतों और 26,012 मेगावाट की क्षमता के फलस्वरूप वर्तमान में प्रदेश में निर्वाध विद्युत सप्लाई कर रही है। साथ ही मध्यप्रदेश एनर्जी सरप्लस राज्य के रूप में कार्य कर रहा है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली की दरों में बदलाव और सौर ऊर्जा परियोजनाओं (जैसे सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना) पर तेजी से काम चल रहा है।

Pooja Khodani
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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

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