नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पांढुर्णा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला किसानों द्वारा रोके जाने के बाद एसपी प्रकाश चंद्र परिहार को हटाए जाने पर सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में आम जनता की जान की कोई कीमत नहीं है लेकिन सत्ता के अहंकार पर जरा सी आंच भी सरकार को बर्दाश्त नहीं है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सिंगरौली में गरीबों के घर उजड़ने के मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि पांढुर्णा में सूखे से परेशान किसान अपनी समस्या मुख्यमंत्री तक पहुंचाना चाहते थे और इसी दौरान उनका काफिला रोक दिया गया। इसके बाद सुरक्षा में चूक का हवाला देकर एसपी को हटा दिया गया।
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क्या है मामला
दरअसल, 4 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पांढुर्णा के दौरे पर थे। दौरे के दौरान कुछ किसान सूखी फसल लेकर मुख्यमंत्री के काफिले के सामने पहुंच गए। किसानों ने कम बारिश से फसल खराब होने की समस्या बताई और पांढुर्णा को सूखाग्रस्त घोषित कर राहत देने की मांग की। मुख्यमंत्री ने किसानों की बात सुनी और अधिकारियों को फसल नुकसान का सर्वे कराने के निर्देश दिए।
इस घटना के बाद पांढुर्णा के पुलिस अधीक्षक प्रकाश चंद्र परिहार को उनके पद से हटा दिया गया। उन्हें पुलिस मुख्यालय भोपाल में एआईजी बनाया गया है। उनकी जगह विदिता धनखड़ को पांढुर्णा का नया एसपी नियुक्त किया गया है। एसपी के तबादले को मुख्यमंत्री की सुरक्षा में हुई चूक से जोड़कर देखा जा रहा है।
उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
उमंग सिंघार ने इसी कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा कफ सिरप मामले में मासूमों की मौत के बाद निलंबित अधिकारियों की बहाली हो गई, सागर में जहरीली शराब से मौतें हुईं, बालाघाट में बैगा आदिवासी बच्चों की जान गई और इंदौर में दूषित पानी से लोगों की मौत हुई, लेकिन इन मामलों में ऐसी तत्काल कार्रवाई देखने को नहीं मिली। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह कार्रवाई सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता अपनी समस्याओं को लेकर परेशान हो, उसकी जान जाए या उसके घर उजड़ें लेकिन सत्ता के रास्ते में कोई बाधा न आए, इसे लेकर सरकार तुरंत कार्रवाई करती है।