मध्यप्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य की औद्योगिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मध्यप्रदेश में मौजूदा हालात को “बर्बादी का डबल इंजन” बताते हुए कहा कि राज्य का औद्योगिक ढांचा संकट के दौर से गुजर रहा है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि पीथमपुर को कभी देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता था और जिसे “मिनी मुंबई” के रूप में पहचान मिली थी, आज आर्थिक मंदी और औद्योगिक ठहराव का सामना कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में उद्योग या तो बंद होने की कगार पर हैं या उत्पादन घटा चुके हैं, जिससे रोजगार पर गंभीर असर पड़ा है।

जीतू पटवारी ने पीथमपुर के औद्योगिक संकट पर सरकार को घेरा

जीतू पटवारी ने कहा कि पीथमपुर में हजारों फैक्टरियां संकट में हैं। जो प्रदेश कभी निवेश का हब बनने का सपना देख रहा था, आज “बेरोजगारी और तालाबंदी का केंद्र” बन चुका है। उन्होंने कहा कि वहां लगभग 5,600 फैक्ट्रियां बंद होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। इसके अलावा लगभग 30,000 कर्मचारियों का वेतन घटाकर आधा कर दिया गया है, जिससे श्रमिकों की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है। साथ ही लगभग 20,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने का भी आरोप लगाया है।

इन्वेस्टर्स समिट को लेकर किए सवाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इन हालात के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि बीजेपी निवेश को लेकर बड़े-बड़े दावे करती रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। उन्होंने इन्वेस्टर्स समिट जैसे आयोजनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए लेकिन न तो नए उद्योग अपेक्षित स्तर पर स्थापित हुए और न ही रोजगार के अवसर बढ़े। जीतू पटवारी ने प्रदेश सरकार के सवाल किया कि इन्वेस्टर्स समिट के नाम पर करोड़ों रुपये के जो इवेंट्स हुए, जनता को उनका फायदा जमीनी स्तर पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश के उद्योगपति और श्रमिक दोनों आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं तब सरकार किस आधार पर विकास का दावा कर रही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह सिर्फ आंकड़ों का मामला नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों की आजीविका का प्रश्न है जिनकी आय उद्योगों पर निर्भर है।