राहत: कारखानों को अब साल में एक बार ही भरना होगा रिटर्न

राहत: कारखानों को अब साल में एक बार ही भरना होगा रिटर्न

भोपाल| लॉक डाउन (Lockdown) में बिगड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने मध्य प्रदेश सरकार (MP Government) उद्योग क्षेत्र में कई राहत दे रही है| श्रम कानून में सुधारों को लेकर अब एक और बड़ा फैसला किया गया है| अब कारखानों को वर्ष में 2 की जगह मात्र एक बार ही रिटर्न भरना पड़ेगा। रिटर्न ऑनलाइन भरा जायेगा। इसकी अधिसूचना श्रम विभाग (Labour Department) द्वारा जारी कर दी गयी है।

प्रमुख सचिव श्रम राजेश राजौरा ने जानकारी दी है कि कारखाना अधिनिमय 1948 के अंतर्गत कारखाना नियम 1962 में संशोधन किया गया है। अब प्रत्येक कारखाने का अधिभोगी या प्रबंधक प्रत्येक कैलेंडर वर्ष में एक फरवरी को या उसके पूर्व वार्षिक रूप से भारत सरकार, श्रम और रोजगार मंत्रालय के वेब पोर्टल पर, निरीक्षक या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी भी अन्य अधिकारी द्वारा अपेक्षित किये गए अनुसार, ऐसे कैलेंडर वर्ष के पूर्ववर्ती वर्ष के संबंध में ऐसे वेब पोर्टल में विनिर्दिष्ट विशिष्टियों के अनुसार जानकारी देते हुए, संयुक्त विवरणी, इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रस्तुत करेगा या अपलोड करेगा।

परंतु ऐसे अधिभोगी या प्रबंधक के लिये इस नियम के अधीन किसी कैलेंडर वर्ष के लिये विवरणी प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं होगा, यदि उसने श्रम विधि के अधीन उक्त वेब पोर्टल पर उस वर्ष के लिये पूर्व में ही वार्षिक विवरणी प्रस्तुत कर दी है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews