मध्यप्रदेश के सबसे बड़े तकनीकी विश्वविद्यालय राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के पुनर्गठन और इसके नाम से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम हटाए जाने के फैसले को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि सरकार तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में सुधार कर रही है या इतिहास मिटाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने याद दिलाया कि आरजीपीवी में 585 संस्थान और 3.83 लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि बीजेपी राजीव गांधी का नाम हटा तो सकती है लेकिन उनके योगदान को किसी भी स्थिति में मिटा नहीं सकती है।
क्या है मामला
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 1 सितंबर को हुई कैबिनेट बैठक में RGPV को तीन अलग-अलग क्षेत्रीय तकनीकी एवं कौशल विश्वविद्यालयों में बांटने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत भोपाल स्थित मौजूदा विश्वविद्यालय को मध्यभारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय, उज्जैन के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय और जबलपुर के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा। तीनों विश्वविद्यालयों के लिए अलग-अलग कानून बनाए जाएंगे।
585 संस्थान और 3.83 लाख से अधिक विद्यार्थी
मौजूदा RGPV के अंतर्गत 13 पाठ्यक्रम, 585 संस्थान और 3.83 लाख से अधिक विद्यार्थी जुड़े हुए हैं। नई व्यवस्था में इन संस्थानों को क्षेत्र के हिसाब से तीन विश्वविद्यालयों में बांटा जाएगा। भोपाल विश्वविद्यालय के अंतर्गत भोपाल, नर्मदापुरम, चंबल और ग्वालियर संभाग आएंगे। उज्जैन विश्वविद्यालय के अधीन उज्जैन और इंदौर संभाग, जबकि जबलपुर विश्वविद्यालय के अंतर्गत जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के संस्थान रखे जाएंगे। सरकार की ओर से इसके पीछे तर्क दिया गया है कि क्षेत्रीय स्तर पर तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकेगा और विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर शैक्षणिक एवं प्रशासनिक सुविधाएं मिलेंगी।
“तीन विश्वविद्यालयों का खर्च कौन उठाएगा”
इसी फैसले पर जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार से कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि RGPV में इतने बड़े स्तर पर संस्थानों और विद्यार्थियों की व्यवस्था चल रही है, ऐसे में इसे तीन हिस्सों में बांटने और राजीव गांधी का नाम हटाने की जरूरत क्यों पड़ी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल किया कि यदि सरकार का उद्देश्य तकनीकी शिक्षा को बेहतर बनाना है तो विश्वविद्यालय के नाम से राजीव गांधी का नाम हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? और यदि उद्देश्य प्रशासनिक विकेंद्रीकरण है तो पूरी व्यवस्था और स्थापित विश्वविद्यालय की पहचान बदलने की जरूरत क्यों महसूस हुई?
उन्होंने मुख्यमंत्री से यह भी पूछा कि तीन नए विश्वविद्यालयों के गठन का खर्च कौन उठाएगा, विद्यार्थियों और कर्मचारियों की मौजूदा व्यवस्था का क्या होगा तथा विश्वविद्यालय की संपत्तियों और भविष्य के बजट की व्यवस्था किस प्रकार की जाएगी।
“नाम हटा सकते हैं, योगदान नहीं”
जीतू पटवारी ने भाजपा पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी का नाम हटाया जा सकता है, लेकिन देश के लिए उनका योगदान नहीं मिटाया जा सकता। उन्होंने कहा है कि वर्ष 2028 में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है और तब इस फैसले को याद रखा जाएगा।
✓ सीधा सवाल : @DrMohanYadav51 सत्ता विश्वविद्यालय बांट रही है या इतिहास मिटा रही है?
• राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में 585 संस्थानों और 3.83 लाख से अधिक विद्यार्थियों की व्यवस्था चल रही है! अब सरकार ने इसे तीन हिस्सों में बांटने और स्व. राजीव गांधी जी का नाम हटाने…
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) September 2, 2026






