मंगलवार को भोपाल के क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में हिंदी भाषा एवं साहित्य को समर्पित ‘हिंदी माह’ का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का आरंभ आरआईई सभागार में भारतीय पारंपरिक दीप प्रज्वलन समारोह के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शिव कुमार गुप्ता, अधिष्ठाता प्रोफेसर जयदीप मंडल, प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, व्याख्याता एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश के ऊर्जा विभाग के सचिव तथा लेखक कैलाश वानखेड़े थे। हिंदी साहित्य के क्षेत्र में भी उनकी उल्लेखनीय उपस्थिति रही है तथा उनकी अनेक रचनाएँ विभिन्न मंचों पर प्रकाशित हो चुकी हैं। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद किया और हिंदी बोलते समय मराठी उच्चारण के कारण उपहास किए जाने का अपना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि विभिन्न बोलियों अथवा उच्चारणों में हिंदी बोलने वाले लोगों का उपहास नहीं करना चाहिए।
‘हिंदी माह’ का शुभारंभ
हिंदी माह के शुभारंभ अवसर पर कैलाश वानखेड़े ने विद्यार्थियों को यह भी प्रेरित किया कि अध्ययन को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी निश्चित आयु तक पहुँचने अथवा किसी नौकरी में नियुक्त होने के बाद भी अध्ययन बंद नहीं करना चाहिए। अध्ययन एक आजीवन प्रक्रिया है, अतः इसके लिए बहाने नहीं बनाने चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने भीतर जिज्ञासु बालक को जीवित रखने तथा विभिन्न परिस्थितियों का आलोचनात्मक विश्लेषण करने का आग्रह किया। उन्होंने मानसिक तनाव को कम करने में सहायक होने के कारण नियमित रूप से अपनी अनुभूतियों एवं विचारों को लिखने की आदत विकसित करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने पूरे भारत में लोगों को जोड़ने वाली एकता की कड़ी के रूप में भाषा के महत्त्व पर विशेष बल दिया।
हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर ज़ोर दिया
‘हिंदी माह’ का आयोजन 1 सितंबर से 30 सितंबर तक किया जा रहा है। इसका उद्देश्य दैनिक जीवन, कार्यालयीन कार्यों, आधिकारिक दस्तावेजों आदि में हिंदी भाषा के अधिकाधिक प्रयोग को प्रोत्साहित करना है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शिव कुमार गुप्ता ने भी अपने संबोधन के माध्यम से हिंदी भाषा के अधिकाधिक प्रयोग पर बल दिया। कार्यक्रम का समापन महाविद्यालय के भाषा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. श्रुति त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।







