उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में 4 सितंबर को होने वाले श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को लेकर तैयारियां तेजी से चल रही हैं। इस बार भगवान कृष्ण, बलराम और सुदामा के लिए नीले रंग के मखमली वस्त्र तैयार किए जा रहे हैं। इन पर मोती, रेशमी धागे और जरदोजी का काम किया जा रहा है। खास बात यह है कि परिधानों के लिए मोती और रेशमी धागे सूरत, जयपुर और कोलकाता से मंगवाए गए हैं।
पालने में विराजने वाले लड्डू गोपाल के लिए सफेद और गुलाबी रंग के खास कपड़े तैयार किए जा रहे हैं। मंदिर में भगवान के वस्त्रों के साथ मुकुट, हार और दूसरे श्रृंगार की भी तैयारी चल रही है। जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालुओं को भगवान का यह खास श्रृंगार देखने को मिलेगा।
चार महीने पहले शुरू हो जाती है तैयारी
सांदीपनि आश्रम में जन्माष्टमी की तैयारियां कई महीने पहले शुरू हो जाती हैं। पुजारी परिवार की पंडित कीर्ति रूपम व्यास के अनुसार, भगवान के कपड़े और श्रृंगार के लिए कपड़े, रंग, धागे और मोती पहले ही चुन लिए जाते हैं। इसके बाद इन्हें तैयार करने का काम शुरू होता है। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय और मेहनत लगती है।
भगवान कृष्ण, बलराम, सुदामा, गुरु सांदीपनि और गुरु माता के लिए इस बार नीले रंग के मखमली वस्त्र बनाए जा रहे हैं। इन कपड़ों पर बारीकी से कढ़ाई और सजावट की जा रही है। मोतियों और रेशमी धागों से तैयार किए जा रहे ये परिधान जन्मोत्सव के दिन भगवान को पहनाए जाएंगे।
सूरत, जयपुर और कोलकाता से आया सामान
भगवान के परिधानों को खास बनाने के लिए सूरत, जयपुर और कोलकाता से मोती और रेशमी धागे मंगवाए गए हैं। इनका इस्तेमाल कपड़ों की सजावट और जरदोजी के काम में किया जा रहा है। वस्त्रों के साथ भगवान के मुकुट, हार और दूसरे श्रृंगार की चीजें भी तैयार की जा रही हैं।
पालने में विराजेंगे लड्डू गोपाल
जन्माष्टमी के मौके पर पालने में विराजने वाले लड्डू गोपाल के लिए सफेद और गुलाबी रंग के खास परिधान तैयार किए गए हैं। इन कपड़ों को भी मोतियों और सुंदर कारीगरी से सजाया जा रहा है। जन्म के समय लड्डू गोपाल को इन्हीं विशेष वस्त्रों में पालने में विराजमान किया जाएगा।
3 सितंबर तक पूरी होगी तैयारी
पुजारी परिवार के अनुसार, 3 सितंबर तक भगवान के सभी वस्त्र और श्रृंगार तैयार कर लिए जाएंगे। इसके अगले दिन यानी 4 सितंबर को जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण सहित अन्य देव स्वरूपों को इन्हीं विशेष परिधानों में सजाया जाएगा। सांदीपनि आश्रम में जन्माष्टमी का यह आयोजन हर साल श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण रहता है।






