सागर ग्रुप जरूरतमंदों को रोजाना पहुंचा रहा दो हजार भोजन के पैकेट

सागर ग्रुप जरूरतमंदों को रोजाना पहुंचा रहा दो हजार भोजन के पैकेट

भोपाल।दिनेश यादव

कोरोना संकटकाल (COVID-19) मैं सागर ग्रुप इस महामारी के समय मे समुदायो के लिये आगे बढ़कर काम कर रहा है और लॉक डाउन अवधि के दौरान जरूरतमंदों को भोजन पैकेट प्रदान करने में मदद कर रहा है। ग्रुप के गांधी नगर कैम्पस स्थित सागर पब्लिक स्कूल व सिस्टेक मेस में प्रत्येक दिन 2000 भोजन पैकेट तैयार हो रहे है और भोपाल नगर निगम को सौंपे जा रहे है।

संदीप श्रीवास्तव व अमरदीप सिंह के मार्गदर्शन में गांधी नगर कैम्पस के सहायक स्टाफ सदस्य, कैंपस स्टाफ व उनके परिवार व समर्पित मेस टीम रोजाना 2000 भोजन के पैकेटस तैयार कर भोपाल नगर निगम को सौंप रहे है जो लॉक डाउन अवधि के दौरान उन्हे जरूरतमंदों मे वितरित कर रहा है सागर ग्रुप और उसके कर्मचारियों ने कोरोना वायरस से लड़ने का संकल्प लिया है और मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान दिया है।

सागर ग्रुप के संस्थापक व चैयरमैंन सुधीर कुमार अग्रवाल और प्रबंधक निदेशक सिद्धार्थ सुधीर अग्रवाल ने कोरोना वायरस संकट के खिलाफ लड़ने के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में 51 लाख रुपये का चेक गत सप्ताह भेंट किया था। प्रदेश मे सागर ग्रुप शिक्षा के क्षेत्र मे सागर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के तहत सागर पब्लिक स्कूल, सिस्टेक कॉलेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सागर मैन्युफैक्चरर्स प्राइवेट लिमिटेड के सागर यार्न्स व कपड़ा; उत्पादन के क्षेत्र मे सागर न्यूट्रीमेंटस के सागर राईस और रियल एस्टेट के क्षेत्र मे अग्रवाल बिल्डर्स व सीएसआर आर्म अभय सागर फाऊंडेशन के जरिये प्रदेश के दो लाख से ज्यादा परिवारो से जुड़ा हुआ है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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