
मध्य प्रदेश में 18 साल से कम आयु वाले बच्चों में दिव्यांगता की पहचान करने के लिए स्क्रीनिंग शिविर लगाये जा रहे हैं, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित एक कमेटी की अनुशंसा पर आयोजित किये जा रहे ये शिविर 15 सितम्बर से शुरू हो गए हैं और ये 14 नवम्बर तक चलेंगे। शिविरों में जिला मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा सूक्ष्म परीक्षण कर प्रमाण-पत्र जारी किए जाएंगे।
मध्य प्रदेश के बच्चों में दिव्यांगता की पहचान एवं त्वरित दिव्यांगता प्रमाण-पत्र उपलब्ध करने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जिला स्तरीय स्क्रीनिंग शिविर आयोजित किये जा रहे हैं। यह शिविर 15 सितंबर से 14 नवंबर 2025 तक आयोजित किए जाएंगे। चिन्हित बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार सुविधाएं और परिचय-पत्र मुहैया कराए जाएंगे।
सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव सोनाली वायंगणकर ने बताया कि मध्य प्रदेश में हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित जुनाईविल जस्टिस कमेटी की अनुशंसा पर 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों में दिव्यांगता की पहचान के लिए शिविर आयोजित किये जा रहे है।
विशेषज्ञ चिकित्सक जारी करेंगे प्रमाण-पत्र
शिविरों में जिला मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा सूक्ष्म परीक्षण कर प्रमाण-पत्र जारी किए जाएंगे। नव चिन्हित दिव्यांग बच्चों को 30 नवंबर तक यूडीआईडी (UDID) नंबर जारी करने तथा शासन की पेंशन व अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने का लक्ष्य रखा गया है।
इन विभागों की होगी सामूहिक भूमिका
वायंगणकर ने बताया कि जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में सभी संबंधित विभाग सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा विभाग, जनजाति कल्याण, लोक स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा, आयुष, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग शिविरों के आयोजन में भूमिका निभाएंगे।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में ये होंगे नोडल अधिकारी
ग्रामीण क्षेत्रों में 7 से 8 पंचायत का तथा शहरी क्षेत्रों में 5 से 6 वार्डों का एक क्लस्टर बनाकर स्क्रीनिंग शिविर आयोजित होंगे। ग्रामीण क्षेत्र के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत तथा शहरी क्षेत्र में आयुक्त नगर निगम को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
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