उमरिया पैरामेडिकल डिप्लोमा परीक्षा 2015 में फर्जी तरीके से अन्य छात्रों की जगह परीक्षा देने वाले छह आरोपियों को न्यायालय ने दोषी करार देते हुए डेढ़-डेढ़ वर्ष का सश्रम कारावास और जुर्माने से दंडित किया है। यह मामला वर्ष 2016 में प्रकाश में आया था।
यह था मामला
27 अगस्त 2016 को अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा द्वारा शासकीय महाविद्यालय उमरिया में पैरामेडिकल डिप्लोमा की परीक्षा आयोजित की गई थी। उस दिन एक्स-रे रेडियोलॉजी विषय की परीक्षा हो रही थी। परीक्षा के समय निरीक्षण के दौरान पर्यवेक्षकों विमला मरानी (सहायक प्राध्यापक इतिहास), प्रदीप सिंह बघेल (कनिष्ठ क्रीड़ा अधिकारी), मुजीबउल्ला शेख (प्रयोगशाला तकनीशियन) और प्राचार्य डॉ. सी.बी. सोंदिया ने छह छात्रों को फर्जी तरीके से परीक्षा देते हुए पकड़ा,जांच में पाया गया कि पंजीकृत छात्र अजीत कुमार चौधरी, कमलेश सिंह गोंड, कमलेश चौधरी, चंद्रप्रताप सिंह, दिलीप कुमार रैदास और प्रांजुल सोनी ने अपने स्थान पर अन्य व्यक्तियों को परीक्षा दिलाने की कोशिश की थी।
मामला हुआ था दर्ज
इस मामले की रिपोर्ट पर थाना कोतवाली उमरिया में अपराध दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420 और मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम 1937 की धारा 3ए/4 के तहत आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया,मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ठोस साक्ष्य और गवाहों के माध्यम से आरोप साबित किए। प्रभावी पैरवी एडीपीओ नीरज पांडेय ने की। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी उमरिया, दीपक कुमार अग्रवाल ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया और सजा सुनाई।
मिली सजा
न्यायालय ने सभी आरोपियों को डेढ़-डेढ़ वर्ष का कठोर कारावास और 500-500 रुपये का अर्थदंड तथा मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम की धारा 3(घ)/4 के तहत 6-6 महीने का सश्रम कारावास और 500-500 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।





