“थाली में आधी रोटी” संविदा कर्मचारियों का प्रदेश स्तरीय आंदोलन जारी

“थाली में आधी रोटी” संविदा कर्मचारियों का प्रदेश स्तरीय आंदोलन जारी

भोपाल,डेस्क रिपोर्ट

संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर आज प्रदेश भर में आधी रोटी और थाली के साथ प्रदर्शन किया जा रहा है। इनका कहना है कि रेगुलर कर्मचारी को पूरी थाली सजाकर दी जा रही है और हमें थाली में आधी रोटी दी जा रही है, इसीलिये हम ये प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रदर्शन में कोरोना से दिनरात जंग लड़ रहे प्रदेश भर के 19000 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी भी शामिल हैं। संविदा चिकित्सक, नर्स,फार्मासिस्ट,लैब टेक्नीशियन, एनएम, प्रबन्धन  इकाइयां,ऑपरेटर,आयुष, एड्स, टीबी परियोजना के समस्त कर्मचारी थाली में आधी रोटी के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं।

नियमितीकरण न किये जाने एवं 5 जून 2018 सामान्य प्रशासन की संविदा नीति, नियमित समकक्ष पद 90 प्रतिशत वेतनमान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में 2 साल बीत जाने के बाद भी लागू न होने से संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों में सरकार के प्रति आक्रोश है। इनका कहना है कि कोविड 19 में ड्यूटी के दौरान 6 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की  आकस्मिक मृत्यु के बाद भी स्वास्थ्य विभाग और प्रदेश सरकार द्वारा किसी भी शहीद कोरोना योद्धा के परिवार को 50 लाख रुपये व अनुकम्पा नियुक्ति नहीं दी गई। मुख्यमंत्री कोविड 19 कल्याण योजना से भी संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को वंचित रखा जा रहा है। साथ ही 10,000 की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि, बीमा, पेंशन,अनुकम्पा, सामाजिक सुरक्षा, मंहगाई-दैनिक भत्ते और नियमित की तुलना में आधे वेतन में ये लोग काम कर रहे हैं। इन्होने सरकार पर आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार द्वारा स्वयं अपनी सरकार के द्वारा निर्मित और पारित हो चुके नियमों का पालन कराने में पूर्णतः नाकाम और असफल साबित हो रही है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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