अब प्रदेश में अंबानी पर सियासत

अब प्रदेश में अंबानी पर सियासत

भोपाल।

राज्य सरकार द्वारा अनिल अंबानी के सासन प्रोजेक्ट को कर्जा चुकाने में दी गई 4 साल की अतिरिक्त मोहलत पर बवाल खड़ा हो गया है ।दरअसल अनिल अंबानी के सासन पावर प्रोजेक्ट पर बिजली, पानी और माइनिंग रॉयल्टी की करोड़ों की राशि बकाया है। राज्य सरकार ने पहले इसकी वसूली की मियाद एक साल बनाई थी। अब उसे चार साल बढ़ा दिया गया है ।

दरअसल अनिल अंबानी ने आवेदन कर इतनी राशि एक साल में चुकाने में असमर्थता जताई थी जिसके बाद निवेश संवर्धन की कैबिनेट कमेटी ने इस पर विचार कर इसे चार साल के लिए बढ़ा दिया है और अब इसका भुगतान चार साल में किस्तों के रूप में किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि सासन प्रोजेक्ट से सस्ती बिजली मिलती है और नियमों में प्रावधान के तहत यह छूट दी जा रही है। प्रदेश सरकार के मंत्री पीछे शर्मा भी इसे राज्य सरकार की उद्योगों को बढ़ावा देने के पीछे की नीति बता रहे हैं लेकिन वहीं राज्य सरकार के इस निर्णय पर भाजपा के नेता और विधायक नरोत्तम मिश्रा ने आपत्ति की है।

नरोत्तम का कहना है कि कमलनाथ सरकार का स्पेशल ऑफर चल रहा है “लूट सके तो लूट ,कमलनाथ की छूट”। नरोत्तम का यह भी कहना है कि राज्य सरकार उद्योगपतियों की सहूलियत के हिसाब से अपनी नीतियां तय कर रही है जबकि उसके पास न तो किसानों का कर्जा चुकाने के लिए पैसा है और ना कन्यादान योजना में लड़कियों को पैसा देने का। पूरी सरकार कॉरपोरेट कल्चर पर चल रही है और गरीब का जीना मुहाल हो गया है ।विपक्ष के इस रवैया से लगता है कि आने वाले समय में यह मामला तूल पकड़ेगा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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