#Lockdown: जान खतरे में डाल तीन गुना महंगा गुटखा-सिगरेट लेने बाहर निकल रहे लोग

#Lockdown: जान खतरे में डाल तीन गुना महंगा गुटखा-सिगरेट लेने बाहर निकल रहे लोग

भोपाल। भोपाल में जिस तरह से लगातार कोरोना संक्रमितों के केस बढ रहे हैं| उसको देखते हुए प्रशासन और सरकार काफी सख्त नजर आ रही है| इस बात का अंदाजा इस बात से लग सकता है कि एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में मुख्यमंत्री शिवराज सिहं चौहान ने यह कहा है कि भोपाल, उज्जैन, इंदौर में 3 मई के बाद भी लॉकडॉउन रहेगा| लेकिन देखा गया है कि शहर की इतनी गंभीर हालत होने के बाद भी राजधानी के 30% लोग अपने घरों से केवल इसलिए निकल रहे हैं कि उन्हे गुटखा और सिगरेट चाहिए और जबकि हैरानी की बात कि गुटखा, सिगरेट, सुपाड़ी की दुकानों को खोलने के लिए सरकार ने मना कर दिया है| फिर जो दुकाने या विक्रेता चोरी-छिपे ये सामान बेच रहे हैं वो तय रेट से अधिक कीमत पर दे रह हैं और लोग खरीद रहे हैं|

इसलिए बढ गए पान मसाला के दाम
कोरोना के चलते शहर में पान मसाला बनाने वाली सभी कंपनियां बंद हैं, कुछ व्यापारियों ने लॉकडाउन से पहले बड़ी मात्रा में पान मसाला और सिगरेट का ऑर्डर दिया था| लेकिन बंद के चलते उनके पास ऑर्डर नही पहुंचा| जिसके बाद बाजार में जितना स्टॉक था उसकी कालाबाजारी शुरू हो गई|

नशा छोड़ने का सुनहरा मौक़ा
वहीं यह एक सुनहरा मौका है लोगों के पास जब लोग अपनी नशे की इस आदत से निजात पा सकते हैं| क्योंकि नशे का कोई भी सामान आसानी से बाजारों में नहीं मिल रहा है और जिन लोगों को बार-बार सिगरेट पीने की इच्छा रहती है वो बचने के लिए अपने मुंह को अन्य खाने की चीजों या निकोटीन के च्यूइंगम चबा कर व्यस्त रख सकते हैं|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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