भोपाल में पेयजल की गुणवत्ता और जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार में राजधानी भोपाल “वॉटर रिस्क ज़ोन” बन गई है और बड़ी संख्या में लोग अब भी सुरक्षित पेयजल से वंचित हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि भोपाल नगर निगम के 5.5 लाख उपभोक्ता खातों में से सिर्फ 3.2 लाख घरों में ही नल कनेक्शन उपलब्ध हैं, जबकि करीब दो लाख परिवार आज भी बोरिंग के पानी पर निर्भर हैं। उनका कहना है कि बारिश के दौरान सीवेज रिसाव के कारण भूजल दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है और ऐसे में नगर निगम लोगों से अपने पानी की जांच कराने की अपील कर रहा है।
कांग्रेस ने पेयजल को लेकर सरकार को घेरा
उमंग सिंघार ने मोहन यादव सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भोपाल अब ‘वॉटर रिस्क ज़ोन’ बन चुका है। उन्होंने पेयजल संकट और पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले छह महीनों में 24,148 पानी के नमूनों की जांच की गई, जिनमें छह निजी ट्यूबवेलों के नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। उन्होंने कहा कि यह दूषित पानी और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम का संकेत है।
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि यदि राजधानी में ही सरकार सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की गारंटी नहीं दे पा रही है तो प्रदेश के अन्य जिलों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए समय रहते प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
स्कूल, अस्पताल और पानी जैसी सुविधाएं मुहैया कराने में नाकाम रहने का आरोप
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार “हर घर जल” के बजाय “हर घर डर” की स्थिति पैदा कर रही है। उन्होंने कहा पहले स्कूल बंद हुए, फिर अस्पतालों की स्थिति खराब हुई और अब लोगों का पीने का पानी भी सुरक्षित नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि जनता ने सरकार को शासन चलाने के लिए चुना है, न कि लोगों को अपने स्तर पर पानी की जांच कराने के लिए मजबूर करने के लिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि “जनता ने भाजपा को सरकार चलाने के लिए चुना था, पानी की जांच कराने के लिए नहीं” उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश इस कुशासन को देख रहा है और जनता इसका जवाब भी देगी।






