नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश समेत पूरे देश में बीपी, शुगर और हृदय रोग की दवाइयों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण कच्चे माल और एपीआई की सप्लाई अटकने से दवा निर्माण लागत में भारी वृद्धि हुई है और कई फैक्टरियां बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की नीतिगत विफलता ने आज देश को उस स्थिति में ला खड़ा किया है, जहां जीवनरक्षक दवाइयां भी आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सिर्फ आर्थिक कुप्रबंधन नहीं, बल्कि जनता के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।

दवाओं की कीमतों में उछाल, उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

उमंग सिंघार ने कहा कि देश में दवाइयों की बढ़ती कीमतें “Make in India” के दावों को पूरी तरह बेनकाब कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण कच्चे माल और एपीआई की सप्लाई अटकने से दवा निर्माण लागत में भारी वृद्धि हुई है और कई फैक्टरियां बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से उन्होंने कहा कि कच्चे माल को लेकर आयात पर निर्भरता के कारण बीपी, शुगर और हृदय रोग जैसी जीवनरक्षक दवाओं के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री जैसे उच्च पद पर बैठे व्यक्ति ने संसद में बड़ी आसानी से कह दिया कि “देश की जनता इस संकट के लिए तैयार रहे”। उन्होंने कहा कि एक ही वैश्विक संकट में पूरी व्यवस्था बेनकाब हो गई और क्या आत्मनिर्भरता सिर्फ भाषणों तक सीमित थी?

दाम बढ़ने का असर सीधा मरीजों की जेब पर

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग लागत में चालीस प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कच्चे माल, पैकेजिंग, पेट्रोलियम सॉल्वेंट और अन्य केमिकल्स की कीमतों में भारी उछाल आया है। एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट की कमी से कई कंपनियां प्रभावित हुई हैं और कुछ फैक्टरियां बंद भी हो गई हैं और इसका सीधा असर आम मरीजों की जेब पर पड़ रहा है।

बता दें कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध के कारण वैश्विक शिपिंग रूट्स प्रभावित हुए हैं जिससे कंटेनरों की कमी और फ्रेट लागत बढ़ गई है। भारत अपनी जरूरी दवाओं के कच्चे माल (API) के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। जानकारी के अनुसार, इस संकट से कुछ कच्चे माल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल से एलोपैथिक दवाओं के मूल्य में 0.65 प्रतिशत की बढ़ोतरी की अनुमति दे दी है। हालांकि, बाजार में कई दवाओं के दाम इससे कहीं अधिक बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संकट लंबा चला तो दवाओं की उपलब्धता और कीमतों पर और अधिक दबाव पड़ सकता है।