आदिवासियों को UCC से अलग रखा जाए: उमंग सिंघार की बड़ी मांग, कहा “जनता की राय ले सरकार”, गेंहू उपार्जन पर घेरा

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि दलित और आदिवासी समुदायों की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराएं हैं, जिनका संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सरकार को सभी वर्गों और समुदायों से राय लेनी चाहिए।
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Umang Singhar

मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन, समान नागरिक संहिता (UCC) और इंदौर के ‘वंदे मातरम’ विवाद को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां किसानों के हितों के बजाय बिचौलियों को फायदा पहुंचाने वाली हैं।

उन्होंने कहा कि लगता है कांग्रेस के धरने प्रदर्शन से बीजेपी डर गई और आज से मध्यप्रदेश में गेंहू उपार्जन की शुरुआत की। इसी के साथ उन्होंने सवाल किया कि गेंरू खरीदी इतनी देरी से क्यों शुरु की गई। यूसीसी को लेकर कांग्रेस नेता ने मांग की है कि आदिवासी समुदाय को इस दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।

गेहूं खरीदी में देरी पर सवाल

उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन के बाद ही प्रदेश में गेहूं खरीदी शुरू की गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार दबाव में आ गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतने दिनों तक खरीदी क्यों नहीं शुरू की गई। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि बिचौलियों को लाभ दिलाने के उद्देश्य से बीजेपी ने देरी से गेंहू उपार्जन प्रारंभ किया।  उन्होंने कहा है कि सरकार इस बात को स्पष्ट रूप से बताए कि इस सीजन में कितनी मात्रा में गेहूं खरीदा जाएगा और कितने किसानों से उपार्जन किया जाएगा।

UCC पर आम राय लेने की मांग

समान नागरिक संहिता को लेकर उमंग सिंघार ने सरकार से सवाल किए। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा कानून लागू करने से पहले सभी वर्गों और समुदायों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए और जनता से आम राय लेनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से दलित और आदिवासी समुदायों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनकी अपनी सांस्कृतिक परंपराएं हैं जिनका संरक्षण जरूरी है। उन्होंने मांग की है कि आदिवासी समुदाय को UCC के दायरे से बाहर रखा जाए और इसे लेकर सरकार अपनी स्टैंड स्पष्ट करे।

‘वंदे मातरम’ विवाद पर प्रतिक्रिया

वहीं इंदौर में कांग्रेस पार्षद रूबीना इकबाल  द्वारा ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारत में हर नागरिक को अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है और उसी के तहत लोग अपने विचार रखते हैं। इसी के साथ उन्होंने आरएसएस पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसे भी अपने अतीत को लेकर जवाब देना चाहिए कि क्यों पचास साल तक उन्होंने भारत का ध्वज नहीं लगाया।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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