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उमंग सिंघार ने केन-बेतवा परियोजना को लेकर MP सरकार को घेरा, कहा ” आदिवासियों का चिता आंदोलन बीजेपी की संवेदनहीनता का प्रमाण”

Written by:Shruty Kushwaha
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नेता प्रतिपक्ष ने छतरपुर-पन्ना सीमा पर चल रहे ‘चिता आंदोलन’ को लेकर आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार विकास के नाम पर आदिवासी परिवारों को उजाड़ रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपनी जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है और कांग्रेस पूरी तरह उनके साथ खड़ी है।
उमंग सिंघार ने केन-बेतवा परियोजना को लेकर MP सरकार को घेरा, कहा ” आदिवासियों का चिता आंदोलन बीजेपी की संवेदनहीनता का प्रमाण”

Umang Singhar

उमंग सिंघार ने छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहे ‘चिता आंदोलन’ को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों का सांकेतिक चिताओं पर लेटना भाजपा सरकार की संवेदनहीनता के खिलाफ दर्दभरी पुकार है लेकिन सरकार उनकी आवाज़ सुनने के बजाय पुलिस कार्रवाई और दमन का रास्ता अपना रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार महिला सशक्तिकरण की बात करती है, उसी शासन में महिलाएं अपने बच्चों के साथ सांकेतिक चिताओं पर लेटने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर आदिवासी परिवारों को विस्थापित कर कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी आदिवासी समाज के अधिकारों और अस्मिता की लड़ाई में प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और यह संघर्ष “सड़क से सदन तक” जारी रहेगा।

स्थानीय निवासियों का आंदोलन जारी

छतरपुर और पन्ना जिलों की सीमा पर स्थित धोड़न डैम (दौधन) क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ शनिवार से चल रहा ‘चिता आंदोलन’ सोमवार को और तेज़ हो गया। रविवार को भी सैकड़ों ग्रामीणों ने सांकेतिक चिताओं पर लेटकर विरोध प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान आदिवासी महिलाएं अपने बच्चों के साथ चिताओं पर लेटी नजर आईं। विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जमीन, जंगल और आजीविका बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में उनके नेता अमित भटनागर की तत्काल रिहाई और विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास तथा वैकल्पिक भूमि देने की मांग शामिल है।

उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा 

उमंग सिंघार ने इस आंदोलन में महिलाओं और बच्चों के सांकेतिक चिताओं पर लेटने की घटना को भाजपा सरकार की “संवेदनहीनता” करार देते हुए बीजेपी पर आदिवासी समाज की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में महिलाओं और बच्चों का चिताओं पर लेटना सरकार के खिलाफ एक दर्दभरी पुकार है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश के आदिवासी परिवार अपनी जल, जंगल और जमीन बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन सरकार उनकी मांगें सुनने की बजाय दमन का रवैया अपना रही है। कांग्रेस नेता ने कहा है कि उनकी पार्टी आदिवासी समाज की अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और यह न्याय की लड़ाई सड़क से सदन तक जारी रहेगी।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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