उज्जैन-जावरा हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का विरोध तेज होता जा रहा है। इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि हाईवे परियोजना से प्रभावित 62 गांवों के किसान अपने हक का मुआवजा मांगने के लिए भोपाल तक आने को मजबूर हो गए हैं, जो प्रशासनिक व्यवस्था की बड़ी विफलता को दर्शाता है।
बता दें कि इस परियोजना के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रभावित किसानों में असंतोष सामने आया है। परियोजना से जुड़े करीब 62 गांवों के किसान अपनी जमीन के लिए तय किए जा रहे मुआवजे को लेकर सवाल उठा रहे हैं और इसे मौजूदा बाजार मूल्य से कम बता रहे हैं।
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किसानों ने की सही मुआवजा देने की मांग
उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड परियोजना को सामान्य हाईवे के रूप में स्वीकृति मिलने के बाद लगभग 400 किसानों ने भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की। किसानों ने मांग की है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में उनकी जमीन का मुआवजा वर्तमान बाजार दर के आधार पर तय किया जाए। इनका कहना है कि वे विकास कार्यों के खिलाफ नहीं है लेकिन जमीन का उचित मूल्य मिलना जरूरी है। प्रभावित किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि जिला प्रशासन द्वारा वर्ष 2024-25 की गाइडलाइन में जमीन की दरों में बहुत सीमित बढ़ोतरी की गई है। उनके अनुसार कई जगहों पर यह वृद्धि लगभग 1700 रुपये प्रति हेक्टेयर से लेकर 5 से 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक ही की गई है, जो मौजूदा बाजार मूल्य के मुकाबले बेहद कम मानी जा रही है।
उमंग सिंघार ने सरकार से किए सवाल
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार को घेरा है। उमंग सिंघार ने कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि किसानों के साथ खुला अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 2 से 4 लाख रुपये प्रति बीघा मुआवजा देकर जमीन अधिग्रहित करना चाहती है, जबकि क्षेत्र में जमीन का बाजार भाव इससे कई गुना अधिक है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अन्नदाताओं की जमीन लेना और उसका उचित मूल्य न देना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने सवाल किया कि जब किसान को न्याय पाने के लिए मुख्यमंत्री आवास के बाहर खड़ा होना पड़े तो यह स्पष्ट हो जाता है कि सरकार की नीतियों के साथ-साथ उसकी नीयत भी संदेह के घेरे में है। उमंग सिंघार ने कहा है कि किसानों को गुमराह करना बंद किया जाए और सरकार तुरंत बाजार दर के आधार पर किसानों के लिए मुआवजा तय करे।