बीजेपी विधायक गोपाल सिंह के वायरल वीडियो पर उमंग सिंघार का हमला, कहा “कैसे बचेगा लोकतंत्र”

कांग्रेस नेता ने कहा कि धनबल का बढ़ता प्रभाव लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने वोट चोरी और राज्यसभा सीट से जुड़े आरोपों का जिक्र करते हुए पूछा कि सत्तारूढ़ दल जनता के जनादेश का सम्मान कब करेगा।
Umang Singhar

मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में कथित खरीद-फरोख्त को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने सीहोर जिले की आष्टा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर के वायरल वीडियो का हवाला देते हुए चुनाव में धनबल के इस्तेमाल और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि बीजेपी विधायक गोपाल सिंह खुद कह रहे हैं कि जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के दौरान 18 सदस्यों में से 10 सदस्यों को खरीद लिया था। उन्होंने इस बयान को चुनाव में धनबल के इस्तेमाल और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने से जोड़ते हुए भाजपा की राजनीतिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

कांग्रेस ने किए सवाल 

इस मामले पर कांग्रसे हमलावर हैं उमंग सिंघार ने भाजपा को घेरते हुए कहा कि “पहले वोट चोरी, फिर चुनाव चोरी, राज्यसभा की सीट चोरी और अब जिला पंचायत की सीट चोरी करने वाली भाजपा आखिर जनता के जनादेश का सम्मान कब करेगी।” उन्होंने सवाल किया कि जब चुनाव में जनता के वोट से ज्यादा धनबल की ताकत चलेगी तो लोकतंत्र कैसे बचेगा।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, बीजेपी विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में विधायक अपने राजनीतिक सफर और जिला पंचायत अध्यक्ष बनने से जुड़े पुराने घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहते सुनाई दे रहे हैं कि उन्होंने 18 में से 10 सदस्यों को खरीद लिया था। उनका यह बयान सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। वायरल वीडियो को लेकर विवाद बढ़ने के बाद गोपाल सिंह इंजीनियर ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने यह बात मजाक-मस्ती में कही थी

गोपाल सिंह इंजीनियर वर्ष 2022 से अक्टूबर 2023 तक सीहोर जिला पंचायत के अध्यक्ष रहे थे। इसके बाद उन्होंने भाजपा के टिकट पर आष्टा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और विधायक निर्वाचित हुए। वायरल वीडियो में जिला पंचायत अध्यक्ष पद से जुड़ा पुराना प्रसंग सुनाए जाने के बाद उनके बयान को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खासतौर पर निर्वाचित सदस्यों को खरीदने संबंधी टिप्पणी ने चुनाव में धनबल की भूमिका को लेकर बहस छेड़ दी है। वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता से जुड़ा मुद्दा बनाया। विपक्ष का सवाल है कि यदि चुनाव में सदस्यों का समर्थन धनबल के जरिए हासिल किया जाता है, तो निर्वाचित संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित होगी।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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