जब बागी पूर्व विधायक को लड़की ने दिया ऐसा करारा जवाब, देखें वीडियो

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भोपाल।

एक तरफ जब पूरा देश कोरोना संक्रमण के चलते लॉक डाउन है ,वही अभी भी कुछ लोगों को राजनीति चमकाने से फुर्सत नहीं है। ऐसी ही एक शख्सियत है मंदसौर के सुवासरा के पूर्व विधायक हरदीप सिंह डंग। कांग्रेस से दो बार विधायक रह चुके डंग हाल ही में “आत्मा की आवाज” सुनकर भाजपा में आए हैं। जाहिर सी बात है कि आत्मा की आवाज किन शर्तों पर तय हुई, यह तो शोध का विषय है ।लेकिन फिलहाल डंग साहब को कोरोना से ज्यादा आने वाले उपचुनाव की पड़ी है। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों से अपील कर रहे हैं कि पूरी तरह सुरक्षित रहने के लिए अपने घरों के अंदर रहें। डंग साहब निकल पड़े बीजेपी का सदस्यता अभियान चलाने ।नेताजी अकेले तो जाएंगे नहीं, लिहाजा साथ में फौज भी हो गई यानी कोरोना संक्रमण से बचने की सारी प्रोटोकोलो की उड़ गई धज्जियां ।गली मोहल्ले घूमते नेताजी जा पहुंचे एक किशोरी के पास और उसे माला पहनाकर बीजेपी में शामिल करने का निमंत्रण देने लगे लेकिन यह क्या, लड़की ने झटके से गले से माला उतारी और बोली कि मुझे नहीं ग्रहण करनी बीजेपी की सदस्यता ।बस फिर क्या था नेताजी अपना सा मुह लेकर आगे बढ़ गये। लेकिन बात इससे भी बड़ी है ।आखिर एक जनप्रतिनिधि जब कोरोना संक्रमण के प्रोटोकॉल की इस तरह धज्जियां उड़ाऐगा तो फिर आम आदमी कैसे इसका पालन करेगा। डंग की इन गतिविधियों की कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह और राज्यसभा सांसद विवेक तंखा ने तीखी आलोचना की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्वीट करके भाजपा में आए इस नयेनवेले नेता पर कार्रवाई की भी मांग की है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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