विश्व खाद्य दिवस: जानिए क्यों मनाया जाता है यह दिन, उद्देश्य-महत्व और इस साल की थीम

अन्न का हर कण और भोजन का हर निवाला अनमोल है। हमारे लिए जो भोजन साधारण है, वह आज भी कई लोगों के लिए जीवन की सबसे बड़ी जरूरत बना हुआ है। विश्व खाद्य दिवस इसी बात की याद दिलाता है कि भोजन की बर्बादी रोकना, भुखमरी से लड़ना और हर व्यक्ति तक पौष्टिक आहार पहुंचाना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। यह दिन अन्न के सम्मान के साथ खाद्य सुरक्षा और कुपोषण जैसी चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश भी देता है।
World Food Day

World Food Day

आज विश्व खाद्य दिवस है। हर साल 16 अक्टूबर को ये दिन दुनियाभर में भुखमरी और कुपोषण जैसी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इस दिन लोगों को भोजन का महत्व समझाने के साथ ही खाद्य सुरक्षा और अन्न की बर्बादी रोकने के लिए प्रेरित किया जाता है।

विश्व खाद्य दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं और भोजन का सम्मान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अन्न का सम्मान हमारी संस्कृति और जीवन का मूल संस्कार है। उन्होंने लोगों से भोजन की बर्बादी रोकने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रत्येक व्यक्ति तक पौष्टिक आहार पहुंचाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक स्वस्थ, सुपोषित और समृद्ध समाज के निर्माण में सभी को अपना योगदान देना चाहिए।

16 अक्टूबर को ही क्यों मनाया जाता है विश्व खाद्य दिवस

विश्व खाद्य दिवस मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की स्थापना से जुड़ी है। इस संगठन की स्थापना 16 अक्टूबर 1945 को हुई थी। वर्ष 1979 में एफएओ के सदस्य देशों ने इसी तारीख को विश्व खाद्य दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया। इसके बाद 1981 में पहली बार यह दिवस मनाया गया।

इस दिन का उद्देश्य दुनिया से भुखमरी खत्म करने, खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने और लोगों को संतुलित आहार के प्रति जागरूक करना है। साथ ही, कृषि उत्पादन बढ़ाने, किसानों की भूमिका को महत्व देने और भोजन की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान देने के लिए भी यह दिन महत्वपूर्ण माना जाता है।

क्या है खाद्य सुरक्षा और क्यों है जरूरी

खाद्य सुरक्षा का मतलब सिर्फ इतना नहीं है कि लोगों के लिए अनाज उपलब्ध हो। इसका अर्थ है कि हर व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिले जिसे वह आसानी से हासिल कर सके। भोजन की कमी, महंगाई और पौष्टिक आहार तक सीमित पहुंच के कारण कई परिवारों को संतुलित भोजन जुटाने में परेशानी होती है।

भुखमरी और कुपोषण का असर खासतौर पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों पर पड़ता है। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए पौष्टिक भोजन जरूरी है। वहीं, महिलाओं और वयस्कों के स्वास्थ्य पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल भोजन उपलब्ध कराने का विषय नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य और जीवन स्तर से भी जुड़ा है।

भोजन की बर्बादी रोकना भी बड़ी जिम्मेदारी

देश में शादियों, सामाजिक आयोजनों, होटलों और घरों में बड़ी मात्रा में भोजन बर्बाद हो जाता है। कई बार जरूरत से ज्यादा खाना तैयार किया जाता है और बाद में उसे फेंक दिया जाता है। दूसरी ओर, ऐसे लोग भी हैं जिन्हें भरपेट भोजन नहीं मिल पाता। यह स्थिति भोजन के सही इस्तेमाल और वितरण की जरूरत को सामने लाती है। भोजन की बर्बादी रोकने के लिए उतना ही खाना बनाना चाहिए, जितनी जरूरत हो। आयोजनों में बचे हुए सुरक्षित भोजन को जरूरतमंदों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा सकती है। इसके अलावा अनाज के सही भंडारण और परिवहन पर ध्यान देकर भी नुकसान कम किया जा सकता है। इससे किसानों की मेहनत और प्राकृतिक संसाधनों की बचत होगी।

इस साल की थीम

इस साल विश्व खाद्य दिवस की थीम है “आज नवाचार करें, कल का पोषण सुनिश्चित करें” (Innovate Today. Nourish Tomorrow)।  इस थीम के जरिए खाद्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीकों, वैज्ञानिक तरीकों और नए विचारों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल, फसलों का बेहतर भंडारण, खाद्यान्न की बर्बादी कम करना और वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाना इसके महत्वपूर्ण पहलू हैं। बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के बीच खाद्यान्न उत्पादन बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में कृषि और खाद्य व्यवस्था में सुधार से किसानों को लाभ पहुंचाने के साथ लोगों तक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।

अन्न का सम्मान और पोषण के प्रति जागरूकता जरूरी

विश्व खाद्य दिवस हमें याद दिलाता है कि भोजन सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं बल्कि स्वस्थ जीवन की बुनियाद है। पर्याप्त और पौष्टिक भोजन मिलने से बच्चों का विकास बेहतर होता है और लोगों को स्वस्थ जीवन जीने में मदद मिलती है। इसके लिए सरकारों के प्रयासों के साथ समाज की समाज भागीदारी भी जरूरी है। भोजन की बर्बादी रोकना, जरूरतमंदों की मदद करना, संतुलित आहार अपनाना और खाद्यान्न का सही इस्तेमाल करना ऐसे कदम हैं, जिनसे हर व्यक्ति योगदान दे सकता है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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