बिहार में पर्यावरण सुरक्षा की अनोखी पहल, प्लास्टिक के कचरे से बनाई जा रही सड़कें

बिहार में मजबूत सड़क बनाने और प्लास्टिक के कचरे का निष्पादन कर पर्यावरण प्रदूषण को कम करने का काम एक साथ किया जा रहा है। यहां सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल से ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत और टिकाऊ सड़कें बनाई जा रही है।
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पर्यावरण सुरक्षा को लेकर बिहार में एक शानदार पहल देखने को मिली है। यहां सिंगल यूज प्लास्टिक के कचरे का इस्तेमाल कर सड़क का निर्माण किया गया है। जी हां, ये बात हैरान करने वाली जरूर है लेकिन प्लास्टिक का प्रसंस्करण कर तीन जिलों में 10.5 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई गई है।

इन सड़कों के तैयार होने के बाद आगामी दिनों में अन्य जिलों में भी इस नवाचार को लागू करने की योजना बनाई जा रही हैं ये प्लास्टिक प्रबंधन और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में एक विशिष्ट पहल है।

कैसे हो रहा उपयोग

खबरों के मुताबिक ग्रामीण विकास विभाग द्वारा लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के अंतर्गत घर घर से कचरा संग्रहण किया जा रहा है। इस कचरे में से सिंगल यूज प्लास्टिक को राज्य में स्थापित किए गए 171 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों पर पहुंचाया जाता है।

इन इकाइयों पर पहुंचने के बाद इस प्लास्टिक का प्रसंस्करण किया जाता है। इसके बाद ये वेस्ट ग्रामीण कार्य विभाग को दिया जाता है। विभाग इस वेस्ट को तारकोल के साथ मिक्स कर गांवों में मजबूत और टिकाऊ सड़कों का निर्माण कर रहा है। खगड़िया, पूर्णिया और औरंगाबाद जैसे जिलों में अब तक 8 टन प्लास्टिक अवशेष का इस्तेमाल कर 10.5 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा चुका है।

मजबूत सड़क और प्लास्टिक का निष्पादन

सड़क निर्माण के संबंध में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार का कहना है कि पर्यावरण सुरक्षा और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के लिए ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों का निर्माण प्लास्टिक के कचरे का उपयोग कर किया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में जल जमाव की समस्या है वहां की सड़कों को अधिक मजबूत बनाना है। वही प्लास्टिक के कचरे का सही निष्पादन करते हुए पर्यावरण प्रदूषण कम करने की कोशिश की जा रही है।

इस संबंध में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के राज्य सलाहकार रत्नेश वर्मा का कहना है कि कम और उच्च घनत्व वाले प्लास्टिक के कतरन को 7% के अनुपात में गर्म तारकोल के साथ मिलाया जाता है। इससे बनने वाली सड़कों के गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है और जल जमाव से इन्हें नुकसान नहीं होता। पारंपरिक सड़कों की अपेक्षा इनकी आयु कई गुना बढ़ जाती है।

Diksha Bhanupriy
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"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
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