बिहार विधानसभा में धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर जोरदार बहस, BJP विधायकों ने लव जिहाद और आबादी वृद्धि का उठाया मुद्दा, सरकार ने प्रस्ताव किया खारिज

बिहार विधानसभा के वित्त सत्र के अंतिम दिन धर्मांतरण विरोधी कानून की मांग को लेकर जमकर हंगामा हुआ। भाजपा विधायकों ने 'लव जिहाद', धोखाधड़ी से धर्मांतरण और सीमावर्ती जिलों में आबादी बढ़ने का मुद्दा उठाया, जबकि सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई कानून बनाने का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
Bihar Assembly

पटना: बिहार विधानसभा में वित्त सत्र के आखिरी दिन अवैध धर्मांतरण, ‘लव जिहाद’ और आबादी में असामान्य वृद्धि जैसे मुद्दों की गूंज सुनाई दी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई विधायकों ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों की तर्ज पर बिहार में भी एक सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने की मांग की, जिसे लेकर सदन में तीखी बहस हुई।

यह पूरा मामला तब गरमाया जब भाजपा विधायक वीरेंद्र पासवान इस मुद्दे पर एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लेकर आए। उन्होंने सदन में कहा कि बिहार में धर्मांतरण विरोधी कानून नहीं होने के कारण ‘जेहादी गतिविधियां’ अपने चरम पर हैं और इसे रोकने के लिए तत्काल कानून की आवश्यकता है।

‘लव जिहाद’ से लेकर आबादी वृद्धि तक, विधायकों ने क्या कहा?

भाजपा विधायकों ने अपने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि विवाह, प्रलोभन और धोखाधड़ी के जरिए राज्य में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कराया जा रहा है। विधायक संजय सिंह ने इसे ‘विचार परिवर्तन’ के साथ-साथ ‘राष्ट्रांतरण’ करार दिया।

उन्होंने कहा, “बिहार के सीमावर्ती कई जिलों में मुस्लिम आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। ईसाई मिशनरियों और इस्लामिक धर्म गुरुओं द्वारा SC/ST/EBC/OBC एवं सामान्य वर्गों की युवतियों को निशाना बनाया जा रहा है।”

विधायकों ने कुछ आंकड़े भी पेश किए, जिनके अनुसार:

  • बिहार में 5,000 से अधिक चर्च स्थापित हो चुके हैं।
  • राज्य में ईसाइयों की जनसंख्या वृद्धि दर 143.23% है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 15.52% है।

इसी बीच, विधायक जीवेश मिश्रा ने एक विशिष्ट घटना का जिक्र करते हुए इसे ‘लव जिहाद’ का मामला बताया। उन्होंने कहा, “यादव समाज की एक लड़की को मोहम्मद सितारे, जो पहले से दो बच्चों का पिता है, भगाकर ले गया है। यह लव जिहाद है। हम इसके खिलाफ कड़े कानून की मांग करते हैं।”

सरकार का दो टूक जवाब- कानून का कोई प्रस्ताव नहीं

विधायकों के आरोपों और मांगों पर सरकार की ओर से गृह विभाग का पक्ष रखते हुए मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने सदन को बताया कि वर्तमान में सरकार के पास धर्मांतरण के खिलाफ कोई कानून बनाने का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

“इस सरकार के पास कन्वर्जन के खिलाफ कानून बनाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।”- अरुण शंकर प्रसाद, मंत्री

सरकार के इस जवाब के बाद भाजपा विधायक भड़क गए और उन्होंने इसका पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है और सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।

अध्यक्ष ने दिया समीक्षा का निर्देश

सदन में बढ़ते हंगामे और विधायकों की जोरदार मांग को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने सरकार को इस पूरे मामले की समीक्षा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, “सरकार इसकी समीक्षा करे और अगर जरूरत महसूस होती है तो कानून बनाया जाए।”

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