
केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान रविवार को पूर्णिया पहुंचे। रंगभूमि मैदान में आयोजित नव संकल्प महासभा में उन्होंने विपक्षी दलों पर कड़ी टिप्पणी की। चिराग ने कांग्रेस और राजद के एमवाई समीकरण को बिहार के पिछड़ेपन की जड़ बताते हुए कहा कि अब जातीय राजनीति को खत्म कर ‘बिहारी फर्स्ट, बिहार फर्स्ट’ की सोच को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
भूतपूर्व दलित मुख्यमंत्री को दी श्रद्धांजलि
सभा की शुरुआत चिराग ने बिहार के पहले दलित मुख्यमंत्री, भोला पासवान शास्त्री की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर की। उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए गर्व की बात है कि उनकी जयंती पर इतनी बड़ी सभा आयोजित हुई। चिराग ने बताया कि आने वाला विधानसभा चुनाव बिहार के अगले पांच साल का भविष्य तय करेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि सब मिलकर बदलाव की राजनीति करें और पिछड़ेपन की जड़ों को खत्म करने का संकल्प लें।
विपक्ष पर सीधे हमले:
चिराग पासवान ने कांग्रेस और राजद को निशाने पर रखते हुए कहा कि विपक्षी पार्टियां मेरी राजनीतिक हत्या करना चाहती थीं। उन्होंने कहा, “मेरे परिवार को तोड़ने, पार्टी को खत्म करने की साजिश रची गई, लेकिन वे भूल गए कि मैं रामविलास पासवान का बेटा हूं, शेर का बेटा हूं।” चिराग ने जोर देकर कहा कि डर के बावजूद वे पीछे नहीं हटेंगे और बिहार को विकास की दिशा में ले जाने का सपना पूरा करेंगे।
जातीय राजनीति और बिहार का पिछड़ापन
सभा में चिराग ने सवाल उठाया कि आजादी के 80 साल बाद भी बिहार पिछड़ा क्यों है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए लोग बाहर जा रहे हैं, रोजगार के लिए युवाओं को पलायन करना पड़ रहा है। उन्होंने जातीय राजनीति को पिछड़ेपन की बड़ी वजह बताया और कहा कि नेता जनता को जाति और धर्म के नाम पर बांटकर सत्ता में बने रहते हैं। चिराग ने आश्वस्त किया कि उनकी प्राथमिकता व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि लोगों की तकलीफें और बिहार का विकास है।
शिक्षा और युवा सशक्तिकरण पर जोर
तेजस्वी यादव का नाम लिए बिना चिराग ने कहा कि कुछ नेता नहीं चाहते कि बिहार के लोग पढ़-लिखें। उन्होंने बताया कि यदि शिक्षा बढ़ेगी तो लोग सवाल पूछेंगे और इसलिए उन्हें बाहर भेजा जाता है। चिराग ने जनता को आश्वस्त किया कि उनके सपनों और आकांक्षाओं से अधिक उनका ध्यान बिहारवासियों की भलाई पर है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में उन्हें और चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन बिहार को विकसित बनाने का उनका सपना कभी टूटेगा नहीं।
