मेयर की तानाशाही के खिलाफ और वार्ड पार्षदों को फिर से मेयर चुनने का अधिकार दिलाने की मांग को लेकर सोमवार (18 अगस्त, 2025) को पटना की सड़कों पर जोरदार प्रदर्शन हुआ। इस प्रदर्शन में पटना नगर निगम के 75 वार्डों के पार्षदों के साथ-साथ पूरे बिहार के अन्य नगर निकायों के वार्ड पार्षद भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने दरोगा राय पथ से मार्च निकालकर जेडीयू कार्यालय का घेराव किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद बीजेपी कार्यालय का भी घेराव किया गया।
वार्ड पार्षदों की प्रमुख मांगें
पार्षदों ने कहा कि उनकी पांच प्रमुख मांगें हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण है बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 23 को पुनर्जीवित करना। इससे पहले वार्ड पार्षदों को मेयर चुनने का अधिकार था, जिसे 2022 में छीन लिया गया। पार्षदों का कहना है कि इस अधिकार के बिना मेयर मनमानी कर रहे हैं और जनहित के काम प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार बढ़ा है और यह स्थिति पूरी तरह अस्वीकार्य है।
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मानदेय और विकास कार्य पर अधिकार की मांग
पटना नगर निगम के वार्ड नंबर-10 के पार्षद सुनील कुमार ने कहा, “क्षेत्र के विकास कार्यों का चयन सिर्फ वार्ड पार्षदों के जिम्मे होना चाहिए, जैसे विधायक और सांसदों को मिलता है।” इसके अलावा उन्होंने वार्ड पार्षदों के मानदेय बढ़ाने की मांग की। फिलहाल पार्षदों को मात्र ढाई हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। सुनील कुमार का कहना था कि मानदेय बढ़ाने से पार्षदों को अपने काम में और सक्रियता लाने का प्रोत्साहन मिलेगा।
चुनाव और सरकारी कार्रवाई पर चेतावनी
पटना वार्ड नंबर-60 के पार्षद प्रतिनिधि बलिराम चौधरी ने कहा कि नगर पालिका में ग्रुप सी और डी की बहाली अविलंब होनी चाहिए, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी है, लेकिन सरकार इसे रोक रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इन मांगों को सरकार पूरा नहीं करती है तो आने वाले चुनाव में पार्षदों का कोप भाजन सरकार को झेलना पड़ेगा और इसका खामियाजा उन्हें भुगतना होगा। बलिराम चौधरी ने कहा कि इस चेतावनी से एनडीए की चिंता बढ़ सकती है और वे पार्षदों की एकता और मांगों को नजरअंदाज नहीं कर सकते।