मध्य प्रदेश की तरह अब बिहार में भी निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसने की तैयारी है। राज्य सरकार ने अभिभावकों के आर्थिक शोषण को रोकने और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए कड़े कदम उठाने का एलान किया है। अब प्रदेश के निजी स्कूल अपनी मर्जी से न तो फीस बढ़ा पाएंगे और न ही ड्रेस व किताबों की खरीद के लिए किसी खास दुकान पर अभिभावकों को मजबूर कर सकेंगे। यह एक ऐसा फैसला है जिससे देशभर के अभिभावक परेशान रहते हैं और अब बिहार सरकार ने इस पर सख्ती दिखाने का मन बना लिया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से इस संबंध में अपनी सख्ती जाहिर की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि प्रदेश के निजी स्कूलों में अब मनमानी नहीं चलेगी। हालांकि, इस पहल का कितना असर होगा, इसे लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं, क्योंकि सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर खुद सरकारी अधिकारियों में ही भरोसा कम देखा जाता है। बावजूद इसके, सरकार ने अभिभावकों को राहत देने और निजी स्कूलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने का इरादा बना लिया है।
निजी स्कूलों के लिए फीस विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जोर देकर कहा है कि सभी निजी स्कूलों को अब अपनी फीस का पूरा विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। यह आदेश फीस स्ट्रक्चर में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से जारी किया गया है। बिना किसी ठोस आधार के सालाना फीस में की जाने वाली बढ़ोतरी पर सरकार की सीधी नजर रहेगी। ऐसे संस्थान जो अनावश्यक शुल्क वसूलकर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डालते हैं, उन पर सख्त नकेल कसी जाएगी। इस कदम से मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिलेगी।
निजी स्कूलों द्वारा ड्रेस और किताबों की खरीद पर नहीं चलेगी मनमानी
निजी स्कूलों की पुरानी कार्यशैली रही है कि वे अभिभावकों को खास दुकानों से ही स्कूल ड्रेस और किताबें खरीदने के लिए बाध्य करते थे, जिससे एक तरह का सिंडिकेट बन जाता था। मुख्यमंत्री ने अब इस पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार कहीं से भी किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगे। स्कूलों द्वारा बनाए गए ऐसे किसी भी सिंडिकेट को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसका उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों और अभिभावकों के हितों की सुरक्षा का उद्देश्य
मुख्यमंत्री चौधरी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इस पहल को ‘निजी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की पहल’ बताया है। उन्होंने कहा कि यह कदम प्रदेश के निजी स्कूलों में मनमानी रोकने, फीस को नियंत्रित करने और छात्रों व अभिभावकों के हितों की रक्षा करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने दोहराया कि निजी विद्यालयों को फीस की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा, साथ ही मनमानी बढ़ोतरी और अनावश्यक शुल्क पर रोक रहेगी।
इसके अतिरिक्त, एक और महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि छात्रों को फीस बकाया होने की स्थिति में भी परीक्षा या परिणाम से वंचित नहीं किया जा सकेगा। यह छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि इन आदेशों का उल्लंघन होने पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है। इन तमाम कदमों से प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और सुलभ बनेगी, जिससे हर वर्ग के छात्रों और अभिभावकों को लाभ मिलेगा।
निजी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की पहल!
प्रदेश के निजी स्कूलों में मनमानी रोकने, फीस को नियंत्रित करने और छात्रों व अभिभावकों के हितों की रक्षा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
निजी विद्यालयों को फीस की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य,…
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) May 12, 2026






