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मोदी के आह्वान पर मोहन का अमल शुरू, सीएम डॉ. यादव के काफिले में अब 13 की जगह सिर्फ 8 गाड़ी, बोले मुख्यमंत्री “राष्ट्रहित सर्वोपरि है”

Written by:Banshika Sharma
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पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत और वीआईपी संस्कृति पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। वहीं अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस दिशा में एक अहम पहल की है, जिससे जनता में एक नया संदेश जाएगा। अब कारकेड में 13 की जगह केवल 8 वाहन ही होंगे।
मोदी के आह्वान पर मोहन का अमल शुरू, सीएम डॉ. यादव के काफिले में अब 13 की जगह सिर्फ 8 गाड़ी, बोले मुख्यमंत्री “राष्ट्रहित सर्वोपरि है”

सड़क पर जब कोई बड़ा काफिला निकलता है, तो आम आदमी की सांसें थम सी जाती हैं। न केवल ट्रैफिक रुकता है, बल्कि मन में यह सवाल भी उठता है कि आखिर इतनी शानो-शौकत की क्या ज़रूरत? पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं और खपत भी बेतहाशा बढ़ रही है। ऐसे में प्रधानमंत्रीजी ने जब ईंधन बचाने का आह्वान किया, तो लोगों को लगा कि शायद अब कुछ बदलेगा। और शायद उनकी यह उम्मीद बेजा नहीं थी, क्योंकि मध्य प्रदेश ने इस दिशा में एक अहम कदम उठाने का संकल्प लिया है। राष्ट्रहित सर्वोपरि है, यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है, जिसे अब शायद गंभीरता से लिया जा रहा है।

दरअसल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस दिशा में एक अनूठी पहल की है। उन्होंने फरमान जारी किया है कि उनके अपने काफिले में अब सुरक्षा की दृष्टि से ही न्यूनतम वाहन होंगे। वह दिन गए जब दस-बारह गाड़ियों का लाव-लश्कर चलता था और सड़क पर मीलों तक ट्रैफिक रोक दिया जाता था। अब कम गाड़ियों में ही काम चलेगा। यह सिर्फ काफिले तक सीमित नहीं है, उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि उनके भ्रमण के दौरान कोई वाहन रैली नहीं निकाली जाएगी। अब सोचिए, नेताओं की रैलियां तो उनके रुतबे की पहचान होती थीं, भीड़ जुटाने का एक जरिया होती थीं, क्या वे सचमुच इस पर अमल कर पाएंगे? यह तो वक्त ही बताएगा कि यह फैसला कितनी मजबूती से लागू हो पाता है।

सभी मंत्रीगणों को भी दी हिदायत

वहीं यह निर्देश सिर्फ मुख्यमंत्री तक ही सीमित नहीं है। सभी मंत्रीगणों को भी हिदायत दी गई है कि वे अपनी यात्रा के समय न्यूनतम वाहनों का उपयोग करें। अब मंत्रियों के लिए ‘न्यूनतम’ का अर्थ क्या होगा, यह तो वक्त ही बताएगा। क्या वे सचमुच अपनी लग्जरी गाड़ियों को छोड़कर एक-दो वाहनों में ही संतुष्ट हो जाएंगे? यह देखना दिलचस्प होगा, क्योंकि सुविधाभोगी जीवनशैली को बदलना आसान नहीं होता। जिन अधिकारियों को तो सब कुछ उपलब्ध हो जाता है, उन्हें दूसरों के दर्द से क्या लेना देना, लेकिन अब उन्हें भी शायद थोड़ी सादगी अपनानी पड़ेगी और अपने काफिले के तामझाम को कम करना होगा। यह निर्णय निश्चित रूप से एक नई बहस छेड़ेगा।

नियुक्त निगम-मंडल पदाधिकारियों के लिए भी स्पष्ट निर्देश

हाल ही में नियुक्त निगम-मंडल पदाधिकारियों के लिए भी स्पष्ट निर्देश हैं कि वे सादगी से कार्यभार ग्रहण करेंगे। अब यह ‘सादगी’ कितनी सादगी होगी, यह भी एक यक्ष प्रश्न है। अक्सर देखा गया है कि पदभार ग्रहण करने के मौके पर भी भव्य आयोजन होते हैं, गाड़ियों का जमावड़ा लगता है, फूल-मालाओं का अंबार लग जाता है। क्या अब ये नए-नवेले पदाधिकारी वाकई फूलों के बजाय सिर्फ फाइलें लेकर अपना काम शुरू करेंगे? क्या वे दिखावे से दूर रहकर वास्तविक जनसेवा की ओर अग्रसर होंगे? यह अपेक्षा करना तो ठीक है, पर हकीकत क्या होगी, यह भी जल्दी ही सामने आ जाएगा।

प्रदेशवासियों से भी आग्रह किया

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से भी आग्रह किया है कि वे सार्वजनिक परिवहन को अपनाएं। यह बात सुनने में तो अच्छी लगती है, लेकिन जिन शहरों में सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था ही चरमराई हुई है, जहां बसें समय पर नहीं आतीं या उनकी संख्या कम है, वहां लोग इसे कैसे अपनाएंगे, यह भी एक बड़ा सवाल है। वैसे भी, जो लोग खुद कभी सार्वजनिक बसों या ट्रेनों में सफर नहीं करते, जब वे यह सलाह देते हैं, तो एक अजीब सी मुस्कान आ जाती है। फिर भी, यदि व्यवस्थाएं सुधारी जाएं, तो निश्चित रूप से लोग इस पहल का स्वागत करेंगे और राष्ट्रहित में अपना योगदान देंगे।

पेट्रोल-डीजल की खपत कम करना, पर्यावरण को बचाना और सरकारी खजाने पर बोझ कम करना, ये सभी राष्ट्रहित में ही हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर मध्य प्रदेश का यह संकल्प सराहनीय है। अब देखना यह है कि यह निर्णय सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहता है, या वाकई हमारी वीआईपी संस्कृति में कुछ बदलाव ला पाएगा। उम्मीद तो यही है कि यह सिर्फ एक दिखावा न हो, बल्कि एक नई शुरुआत हो, जो आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सके और सही मायने में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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