Hindi News

“वे अपनी जिम्मेदारियों से एक बार फिर चूक गए..” RJD सांसद मनोज झा का प्रधानमंत्री मोदी पर बड़ा हमला, जानें क्यों कहा ऐसा

Written by:Gaurav Sharma
Published:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपीलों पर विपक्ष ने तीखा पलटवार किया है, जिसमें राजद सांसद मनोज झा और कांग्रेस नेता राजेश राठौर ने सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
“वे अपनी जिम्मेदारियों से एक बार फिर चूक गए..” RJD सांसद मनोज झा का प्रधानमंत्री मोदी पर बड़ा हमला, जानें क्यों कहा ऐसा

राजनीति के अखाड़े में इन दिनों एक नई बहस छिड़ी है, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपीलों ने विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का एक और मौका दे दिया है। अक्सर ऐसा होता है कि जब बड़े फैसले लिए जाते हैं या कोई बड़ी बात कही जाती है, तो उसकी गूँज देर तक सुनाई देती है और उस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आती हैं। कुछ ऐसा ही नजारा सोमवार (11 मई, 2026) को भी देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री ने देश की जनता से साल भर तक सोना न खरीदने जैसी कई बातें कहीं, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

राजद सांसद मनोज झा ने तो प्रधानमंत्री पर सीधे तौर पर बड़ा हमला बोल दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब देश को एक मजबूत नेतृत्व और निर्णायक कदमों की आवश्यकता थी, तब सरकार और उसके मुखिया चुनाव की व्यस्तताओं में खोए हुए थे। झा ने तल्ख लहजे में कहा कि उस वक्त इनके ही लोग जनता को यह कहकर शांत करने में लगे थे कि ‘पैनिक मत करिए’। लेकिन, उस दौर में हजारों करोड़ रुपए चुनाव प्रचार में पानी की तरह बहा दिए गए। किसकी जेब से ये पैसे निकले और कहाँ गए, इस पर तो कभी अलग से विस्तार से बात की जाएगी, लेकिन यह सवाल आज भी हवा में तैर रहा है कि आखिर जनता की गाढ़ी कमाई का यह पैसा किस मकसद से और किसके इशारे पर खर्च किया गया। बीते एक हफ्ते में अखबारों के दो-दो पन्नों पर छपने वाले जैकेट विज्ञापनों का जिक्र करते हुए मनोज झा ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर ये विज्ञापन किसके पैसे से आ रहे हैं? प्रधानमंत्री के निजी पैसों से तो नहीं, बल्कि यह तो जनता का ही पैसा है, जो इस तरह से खर्च किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री की अपीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोज झा ने साफ शब्दों में कहा कि देश तो हमेशा से सहयोग करता आया है। कोविड महामारी के दौरान भी देश ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई थी, लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री को यह हकीकत स्वीकार करने की सलाह दी कि वे अपनी जिम्मेदारियों से एक बार फिर चूक गए हैं। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि जनता ने हमेशा संकट की घड़ी में सरकार का साथ दिया है, लेकिन जब सरकार को आगे बढ़कर कमान संभालनी थी, तब वह कहीं न कहीं अपने कर्तव्यों से विमुख होती नजर आई।

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर लगाए गंभीर आरोप

एक तरफ जहाँ मनोज झा ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए, वहीं बिहार कांग्रेस के नेता राजेश राठौर ने तो प्रधानमंत्री पर सीधे-सीधे यह आरोप लगा दिया कि नरेंद्र मोदी देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्हें जनता से सब कुछ चाहिए, लेकिन बदले में वे जनता को कुछ भी देने को तैयार नहीं होते। राठौर ने अपने शब्दों में तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि जब वे पहली बार सत्ता में आए तो नोटबंदी जैसा बड़ा फैसला लेकर जनता की सारी जमापूंजी बैंक खातों में जमा करवा दी, लोगों को लंबी-लंबी कतारों में खड़ा कर दिया और इस प्रक्रिया में सैकड़ों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। फिर जब कोरोना काल आया, तब भी सरकार ने बीमारी का निदान करने की बजाय जनता से ताली बजाने, थाली पीटने और मोबाइल की रोशनी जलाने जैसी अपीलों में ही अपना समय बर्बाद कर दिया, यह सोचकर कि शायद इससे कोरोना भाग जाएगा।

पीएम मोदी की अपील पर कांग्रेस का हमला

अब जब प्रधानमंत्री जनता से सोना न खरीदने की अपील कर रहे हैं, तब भी राजेश राठौर ने अपनी बात बेबाकी से रखी। उन्होंने प्रधानमंत्री के इस बयान पर भी निशाना साधा, जिसमें वे कहते हैं कि देश में तेल का कुआँ नहीं है, इसलिए पेट्रोल-डीजल का खर्च कम करना चाहिए। इस पर पलटवार करते हुए राठौर ने कहा कि प्रधानमंत्री जी, आपने तो पिछले 12 सालों में देश में विनाश का ऐसा गहरा गड्ढा खोद दिया है कि उसमें तेल का कुआँ भला रहेगा कैसे? उनका यह बयान सरकार की आर्थिक नीतियों और दूरदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है, मानो वे यह कह रहे हों कि जब नींव ही कमजोर कर दी गई हो, तो इमारत कैसे खड़ी रहेगी। विपक्ष का यह हमला साफ दर्शाता है कि आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री की हर अपील और हर कदम पर राजनीतिक खींचतान और गरमाएगी।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
Follow Us :GoogleNews