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“बंगाल को बचाने के लिए ममता-अभिषेक को कर देना चाहिए नजरबंद..” जीतन राम मांझी की पार्टी का बड़ा बयान

Written by:Gaurav Sharma
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के उपरांत राजनीतिक हिंसा एवं अराजकता के बीच जीतन राम मांझी की पार्टी ने ममता बनर्जी व अभिषेक बनर्जी को नजरबंद कर जांच की मांग की है।
“बंगाल को बचाने के लिए ममता-अभिषेक को कर देना चाहिए नजरबंद..” जीतन राम मांझी की पार्टी का बड़ा बयान

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम के उपरांत उत्पन्न हुए सियासी घमासान एवं राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) ने केंद्र सरकार से ममता बनर्जी तथा उनके भतीजे तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को नजरबंद करने की मांग करते हुए एक बड़ा बयान जारी किया है। भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के बाद बंगाल में व्याप्त राजनीतिक परिदृश्य पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने शुक्रवार, 08 मई, 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी किया है। इस बयान में उन्होंने केंद्रीय सत्ता से कठोर एवं निर्णायक कदम उठाने का आह्वान किया है।

डॉ. संतोष कुमार सुमन ने पश्चिम बंगाल की वर्तमान स्थिति पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने उल्लेख किया है कि राज्य में लंबे समय से राजनीतिक हिंसा, भ्रष्टाचार तथा संरक्षण प्राप्त माफिया तंत्र का माहौल बना हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि इस दूषित वातावरण ने लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं संवैधानिक संस्थाओं को निरंतर कमजोर करने का कार्य किया है, जिससे राज्य की जनता में भय और अराजकता का प्रसार हुआ है। सुमन ने स्पष्ट रूप से कहा कि बंगाल की जनता भय, अराजकता तथा राजनीतिक प्रताड़ना के वातावरण से त्रस्त रही है। ऐसे में यह अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि केंद्र सरकार तुरंत हस्तक्षेप करे और ममता बनर्जी तथा अभिषेक बनर्जी को नजरबंद कर उनके कथित नेटवर्क, राजनीतिक संरक्षण प्राप्त तंत्र तथा सीमा पार संबंधों की निष्पक्ष एवं गहन जांच कराए। यह जांच राज्य में विधि के शासन को पुनः स्थापित करने के लिए अपरिहार्य है।

ममता के इस्तीफा न देने पर संतोष सुमन ने उठाए सवाल

संतोष सुमन ने ममता बनर्जी द्वारा मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देने के मामले को एक असाधारण स्थिति करार दिया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं एवं संवैधानिक भावना के विपरीत बताया, जो एक गंभीर विषय है। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सत्ता से चिपके रहने की यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर संकट बनती जा रही है। लोकतंत्र में उत्तरदायित्व सर्वोपरि होता है और जनता के विश्वास पर आघात पहुंचने के उपरांत नैतिक दायित्व का निर्वहन अपरिहार्य हो जाता है। किसी भी लोकतांत्रिक प्रणाली में, जनता के प्रति जवाबदेही और संवेदना अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, विशेषकर तब जब जनादेश में स्पष्ट परिवर्तन दिखाई देता है।

उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में संवेदनशीलता का रुख जनता के प्रति ही होना चाहिए, न कि सत्ता के संरक्षण में पल रहे भ्रष्ट एवं हिंसक तंत्र के प्रति। डॉ. सुमन ने इस बात पर जोर दिया कि अब वह समय आ गया है जब बंगाल में विधि का शासन स्थापित हो और दोषियों को विधि के प्रावधानानुसार दण्डित किया जाए। उनके अनुसार, कथित राजनीतिक-माफिया गठजोड़ और अंतरराष्ट्रीय सरगनाओं से जुड़े मामलों की गहन जांच राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अत्यंत अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति या परिवार को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता, और सभी को समान रूप से विधि के समक्ष उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए। डॉ. सुमन ने अंत में यह विश्वास व्यक्त किया है कि बंगाल की जनता अब भय और हिंसा की राजनीति नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता तथा विकास चाहती है, जिसके लिए केंद्र सरकार को त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही करनी चाहिए।

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