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प्रधानमंत्री मोदी अब किसे कहेंगे शहजादा? तेजस्वी यादव ने ‘परिवारवाद’ को लेकर छेड़ी नई जंग, BJP-JDU पर साधा निशाना

Written by:Gaurav Sharma
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बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भाजपा-जदयू पर परिवारवाद को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने पीएम मोदी से पूछा, अब किसे शहजादा कहेंगे?
प्रधानमंत्री मोदी अब किसे कहेंगे शहजादा? तेजस्वी यादव ने ‘परिवारवाद’ को लेकर छेड़ी नई जंग, BJP-JDU पर साधा निशाना

बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सियासी पारा गरमा गया है, जहाँ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भाजपा, जदयू और समूचे एनडीए गठबंधन पर परिवारवाद के मुद्दे को लेकर करारा प्रहार किया है। उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस ने न केवल सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘शहजादा’ वाले बयान को भी सीधे तौर पर चुनौती दी है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने परिवारवाद पर बोलने का अपना नैतिक अधिकार खो दिया है, क्योंकि बिहार के नए मंत्रिमंडल में तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों को मंत्री बनाया गया है। अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि प्रधानमंत्री मोदी अब किसे शहजादा कहकर संबोधित करेंगे, यह एक नई राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया कि राजद और उसके सहयोगी दल जनादेश के माध्यम से सत्ता में आए थे, जबकि भाजपा और जदयू परिवारवाद के मुद्दे पर केवल राजनीतिक रोटियाँ सेंक रहे हैं। उन्होंने लालू प्रसाद यादव पर हमला करने को एक अलग बात बताया, लेकिन यह भी कहा कि आज के कई बड़े नेता उसी राजनीतिक पाठशाला से निकले हैं। तेजस्वी ने यहाँ तक दावा किया कि भाजपा में अब ‘ओरिजनल भाजपाई’ नहीं बचे हैं, और आने वाले समय में दोनों उपमुख्यमंत्रियों के बच्चों को भी राजनीति में सक्रिय देखा जाएगा, जो वंशवाद की बेल को और आगे बढ़ाएगा।

तेजस्वी यादव ने राजनीतिक हिस्सेदारी पर भी उठाए सवाल

राजद नेता ने छोटे और वंचित तबकों की राजनीतिक हिस्सेदारी पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा छोटी जातियों का वोट तो लेती है, लेकिन उन्हें सत्ता में उचित प्रतिनिधित्व नहीं देती। लालू यादव ने जहाँ कई मुसलमानों को टिकट देकर मुख्यधारा में शामिल किया, वहीं तेजस्वी ने भाजपा से पूछा कि उसने कितने मुसलमानों को राजनीति में मौका दिया है। यह आरोप भाजपा की समावेशी राजनीति के दावों पर सीधा हमला है।

बिहार के विकास के मोर्चे पर भी तेजस्वी यादव ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि राज्य आज भी रोजगार, दवाई और कमाई जैसे मूलभूत क्षेत्रों में पिछड़ा हुआ है। सरकार केवल मंत्री और विधायक बनाने की राजनीति में उलझी हुई है, जबकि विकास के मुद्दों पर कोई ठोस चर्चा या कार्य नहीं हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले छह महीनों में सरकार ने कोई बड़ा काम नहीं किया, केवल योजनाओं के नाम बदलने का काम हुआ है। पेंशन योजना, आवास योजना और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को लेकर भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधा, यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं आया है।

परिवारवाद के सबसे बड़े पोषक बन गए मोदी: तेजस्वी यादव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को परिवारवाद का पोषक बताते हुए तेजस्वी यादव ने इसका जीता-जागता उदाहरण पेश किया। उन्होंने बिहार के नए मंत्रिमंडल में शामिल कई चेहरों पर उँगली उठाई, यह दिखाते हुए कि कैसे वंशवाद की बेल को सींचकर मोदी परिवारवाद के पोषक, रक्षक और संरक्षक बन गए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पिता जहाँ पूर्व मंत्री थे, वहीं उनकी माता और भाई भी पूर्व विधायक/उम्मीदवार रहे हैं। उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी के पिता भी पूर्व विधायक रहे हैं। इसी क्रम में मंत्री निशांत कुमार का नाम लेते हुए तेजस्वी ने बताया कि उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं, और बेटे ने बिना किसी संघर्ष या राजनीतिक योगदान के सीधे मंत्री पद हासिल कर लिया। नीतीश मिश्रा के पिता भी पूर्व मुख्यमंत्री और चाचा पूर्व मंत्री रहे हैं। संतोष सुमन, जिनके पिता वर्तमान केंद्रीय मंत्री हैं, उनकी पत्नी विधायक और सास भी विधायक हैं, जबकि साला राज्य मंत्री है। दीपक प्रकाश के पिता सांसद-पूर्व मंत्री और माता वर्तमान विधायक हैं। श्रेयसी सिंह के पिता पूर्व मंत्री और माता पूर्व सांसद हैं। अशोक चौधरी के पिता पूर्व मंत्री और पुत्री वर्तमान सांसद हैं। सुनील कुमार के पिता पूर्व मंत्री और भाई पूर्व सांसद हैं। रमा निषाद के पति पूर्व सांसद और ससुर पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे हैं। शीला मंडल के ससुर पूर्व मंत्री और पूर्व राज्यपाल थे। बुलो मंडल की पत्नी पूर्व विधायक रह चुकी हैं। लेसी सिंह के पति पूर्व जिला अध्यक्ष थे। श्वेता गुप्ता के पति पूर्व लोकसभा उम्मीदवार रहे हैं, जिनके फर्जी सर्टिफिकेट मामले के बारे में भी आरोप लगाए जाते हैं। संजय टाइगर के भाई पूर्व विधायक थे। भगवान सिंह कुशवाहा के ससुर एक वामपंथी नेता रहे हैं। रामकृपाल यादव के बेटे भी राजनीति में सक्रिय हैं। इसके अतिरिक्त, बचे हुए ज़्यादातर मंत्रियों के रिश्तेदार भी पंचायत स्तर से लेकर ऊपर तक सार्वजनिक प्रतिनिधि और राजनीति में सक्रिय हैं, जो परिवारवाद के जाल को और गहरा करते हैं।

तेजस्वी यादव ने यह चिंता व्यक्त की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब किसे राजकुमार, युवराज या युवा राजा कहेंगे। उनके अनुसार, बेचारे प्रधानमंत्री को अब अपनी कैबिनेट में बिहार के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों नीतीश कुमार, जीतन राम मांझी और जगन्नाथ मिश्रा के बेटों को यंग किंग और प्रिंस कहना पड़ेगा। बिहार में प्रधानमंत्री के गठबंधन में शामिल सभी पार्टियाँ चाहे वह रामविलास पासवान जी की पार्टी हो, नीतीश कुमार की पार्टी हो, जीतन राम मांझी की पार्टी हो, या उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी हो, सभी परिवार आधारित हैं। यहाँ तक कि भाजपा ने भी अपने कोटे से ज़्यादातर भाई-भतीजावाद और वंशवाद वाले लोगों को ही मंत्री बनाया है, जो परिवारवाद के खिलाफ उनके अपने ही बयानों को खोखला साबित करता है। यह राजनीतिक घटनाक्रम बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत है, जहाँ परिवारवाद का मुद्दा अब केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहकर सीधे तौर पर सत्ताधारी गठबंधन की नीति और नीयत पर सवाल उठा रहा है।

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