बिहार की राजनीति में ‘जूते’ पर बवाल, समर्थक ने भाई वीरेंद्र को दिया 2500 का जूता! क्या है इसके पीछे का ‘राज’?

बिहार की राजनीति में ‘जूते’ पर बवाल, समर्थक ने भाई वीरेंद्र को दिया 2500 का जूता! क्या है इसके पीछे का ‘राज’?

बिहार की राजनीति इन दिनों आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र के वायरल ऑडियो को लेकर गर्मा गई है. ऑडियो में कथित रूप से विधायक को एक पंचायत सचिव से तीखी बहस करते हुए सुना जा सकता है. बातचीत के दौरान उन्होंने सचिव को ‘जूता मारने’ जैसी टिप्पणी की, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया. पंचायत सचिव संदीप कुमार ने इस बयान को गंभीरता से लेते हुए विधायक के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करा दिया. इस बीच, मामले की जांच शुरू होने के साथ ही बीडीओ ने पंचायत सचिव को भी शो-कॉज नोटिस भेजा है, जिससे यह विवाद और गहरा गया है.

समर्थकों का अनोखा प्रदर्शन, विधायक को भेंट किया जूता

मामले के बीच गुरुवार को एक और वीडियो वायरल हुआ जिसमें विधायक भाई वीरेंद्र के समर्थक उन्हें जूते का जोड़ा गिफ्ट करते नजर आए. विधायक ने भी इसे हंसते-खेलते स्वीकार किया. समर्थकों का कहना है कि विधायक ने जो टिप्पणी की, वह भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को सबक सिखाने के लिए थी. सीतामढ़ी से आए एक समर्थक ने कहा, “बिहार में भ्रष्ट कर्मचारियों का यही हाल होना चाहिए. जनता सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाती है, लेकिन काम नहीं होता. मेरी दादी का मृत्यु प्रमाण पत्र आज तक नहीं बना. विधायक जी ने जो कहा, वह बिल्कुल सही कहा.” समर्थकों ने यहां तक ऐलान किया कि वे आगे 500 और जूते लेकर आएंगे.

विधायक ने दी सफाई, बताया ‘स्लिप ऑफ टंग’

विवाद पर सफाई देते हुए भाई वीरेंद्र ने कहा कि उन्होंने केवल जनता के काम के लिए पंचायत सचिव को फोन किया था, लेकिन बहस के दौरान शब्द गलती से निकल गए. उन्होंने कहा, “हमें यह भी नहीं पता था कि वह किस जाति से हैं. हम किसी को जूता मारने वाले लोग नहीं हैं. हम कानून का पालन करते हैं और कानून का पालन करने वाला किसी को जूता नहीं मारता. यह बस स्लिप ऑफ टंग था. सचिव ने ठीक से बात नहीं की और गलत तरीके से जवाब दिया.” विधायक ने आगे कहा कि कई लोगों ने उन्हें फोन कर समर्थन जताया है और कहा कि उन्होंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला.

आगे बढ़ सकता है विवाद

मामले के कानूनी पहलू को देखते हुए यह विवाद आगे भी बढ़ सकता है. पंचायत सचिव की ओर से दर्ज कराए गए एससी-एसटी एक्ट के मामले में पुलिस जांच करेगी और बीडीओ द्वारा जारी शो-कॉज नोटिस के जवाब भी मांगे जाएंगे. राजनीतिक स्तर पर भी इस विवाद ने माहौल गरमा दिया है. विपक्ष इसे आरजेडी की कार्यशैली का उदाहरण बता रहा है, वहीं समर्थक इसे जनता की आवाज करार दे रहे हैं. फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस विवाद का अंत राजनीतिक समझौते से होगा या फिर कानूनी लड़ाई के जरिए.

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