पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र में शिक्षा विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान सियासी बयानबाजी और सरकारी घोषणाओं का दौर देखने को मिला। एक ओर जहां बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर ने महाभारत के उदाहरणों से पिछली सरकारों पर निशाना साधा, तो वहीं शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने छात्रों के लिए एक बड़ी घोषणा की।
सदन में चर्चा के दौरान बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर ने बिहार के पिछले 30 सालों के राजनीतिक सफर को हस्तिनापुर की कहानी से जोड़ते हुए विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने लालू प्रसाद यादव का नाम लिए बिना उन्हें ‘धृतराष्ट्र’ की संज्ञा दी।
महाभारत के पात्रों से लालू-नीतीश की तुलना
मैथिली ठाकुर ने अपने भाषण में 2005 से पहले के बिहार का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में हस्तिनापुर को बचाने की चिंता नहीं थी, बल्कि दुर्योधन को बचाने की फिक्र थी।
“2005 से पहले अंधे धृतराष्ट्र देखना भी नहीं चाहते थे, क्योंकि उन्हें हस्तिनापुर की जगह दुर्योधन की चिंता लगी रहती थी, लेकिन 2005 में सुशासन आया।”- मैथिली ठाकुर, बीजेपी विधायक
उन्होंने आगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तुलना महाभारत के पात्र युधिष्ठिर से करते हुए कहा कि 2005 में जब उन्होंने सत्ता की बागडोर संभाली, तब बिहार में सुशासन की स्थापना हुई। इस बयान के बाद सदन में कुछ देर के लिए माहौल गरमा गया।
छात्रों को बड़ा तोहफा, छात्रवृत्ति की राशि दोगुनी
वहीं दूसरी ओर, चर्चा का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया और एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने कक्षा 1 से लेकर 12वीं तक के छात्र-छात्राओं के लिए मिलने वाली छात्रवृत्ति की राशि को दोगुना कर दिया है।
शिक्षा मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, “अब तक 1 करोड़ 6 लाख से अधिक विद्यार्थियों के बैंक खातों में सीधे डीबीटी के माध्यम से राशि भेजी जा चुकी है।” उन्होंने यह भी बताया कि बिहार की साइकिल और पोशाक योजना की सराहना वैश्विक स्तर पर हुई है और कई देश इस मॉडल को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
शिक्षा पर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा खर्च कर रहा बिहार
मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि बिहार अपनी कुल जीडीपी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च कर रहा है, जो 14 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के बिना राज्य का विकास संभव नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि जहां साल 2005 में शिक्षा का बजट मात्र 2400 करोड़ रुपये था, वहीं आज यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक बन चुका है।





