
बिहार की छपरा विधानसभा सीट इस बार सबसे हॉट सीट बन गई है, जहां भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव आरजेडी के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। कभी लालू प्रसाद यादव का गढ़ रही यह सीट पिछले दो दशकों से बीजेपी के कब्जे में है। 2005 के बाद से नीतीश कुमार और बीजेपी गठबंधन ने यहां सामाजिक समीकरण बदल दिए, जिससे वैश्य, भूमिहार और सवर्ण वोट बीजेपी के पक्ष में मजबूत हो गए।
लालू यादव ने 1977 में यहीं से लोकसभा चुनाव जीतकर राजनीति की शुरुआत की थी और 1990 के दशक में छपरा को अपना राजनीतिक प्रयोगशाला बनाया। राजद के उदित राय ने तीन बार जीत हासिल की, लेकिन 2005 में जदयू के राम प्रवेश राय ने किला ढहा दिया। इसके बाद 2010 में बीजेपी के जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, फिर 2015 और 2020 में डॉ. सीएन गुप्ता ने लगातार जीत दर्ज की। इस बार बीजेपी ने डॉ. गुप्ता को हटाकर वैश्य समुदाय की छोटी कुमारी को उम्मीदवार बनाया है।
जबरदस्त लोकप्रियता और भोजपुरी प्रशंसक
खेसारी लाल यादव की जबरदस्त लोकप्रियता और भोजपुरी प्रशंसकों में पैठ के बावजूद उनकी राह आसान नहीं है। उनके रोड शो में हजारों की भीड़ उमड़ रही है, लेकिन जातीय समीकरण बीजेपी के पक्ष में हैं। छपरा में 90 हजार बनिया, 50 हजार राजपूत, 45 हजार यादव और 39 हजार मुस्लिम मतदाता हैं। आरजेडी को यादव-मुस्लिम वोट के अलावा ओबीसी और दलित समर्थन चाहिए, जबकि बीजेपी का वैश्य-सवर्ण आधार मजबूत है।
आखिर क्या कहता है इतिहास
इतिहास गवाह है कि भोजपुरी स्टार्स अपना पहला चुनाव अक्सर हार जाते हैं। रवि किशन, निरहुआ, मनोज तिवारी और पवन सिंह जैसे सितारे भी पहले प्रयास में असफल रहे। खेसारी की फिल्मी चमक क्या वोट में तब्दील हो पाएगी, यह चुनाव नतीजे ही बताएंगे। बीजेपी में बागी राखी गुप्ता के मैदान में उतरने से थोड़ी मुश्किल जरूर बढ़ी है, लेकिन पार्टी का पारंपरिक वोटबैंक बरकरार है।
