बिहार के गया जिले के फतेहपुर प्रखंड के रघुनाथ नगर गांव में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब चार साल का पीयूष कुमार खेलते-खेलते एक खुले बोरवेल में गिर गया। बताया गया कि बोरवेल करीब 300 फीट गहरा था, जबकि बच्चा लगभग 30 से 35 फीट की गहराई पर जाकर फंस गया। घटना की जानकारी मिलते ही गांव में लोगों की भीड़ जमा हो गई और प्रशासन को तुरंत सूचना दी गई।
जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बिना देरी किए बचाव अभियान शुरू कराया। जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर के निर्देश पर स्थानीय प्रशासन, पुलिस, SDRF और बाद में NDRF की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों का पहला लक्ष्य बच्चे तक लगातार ऑक्सीजन पहुंचाना और उसकी स्थिति पर नजर बनाए रखना था, ताकि रेस्क्यू के दौरान कोई खतरा न हो।
NDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन कैसे बना सफल?
बचाव अभियान आसान नहीं था। बच्चा संकरी जगह में फंसा हुआ था, इसलिए हर कदम बेहद सावधानी से उठाया गया। सबसे पहले पाइप के जरिए लगातार ऑक्सीजन पहुंचाई गई ताकि बच्चे को सांस लेने में दिक्कत न हो। इसके साथ ही एक कैमरा नीचे भेजा गया, जिससे टीम लगातार उसकी स्थिति पर नजर रखती रही। प्रशासन ने बच्चे की मां को भी मौके पर बुलाया और पाइप के जरिए उसकी आवाज बच्चे तक पहुंचाई गई, ताकि वह घबराए नहीं और शांत रहे।
रेस्क्यू टीम ने पोकलेन मशीन की मदद से बोरवेल के पास समानांतर खुदाई शुरू की। इसके बाद विशेषज्ञों ने सुरक्षित तरीके से बच्चे तक पहुंचने की योजना पर काम किया। कई घंटे की मेहनत और तकनीकी प्रक्रिया के बाद आखिरकार रात करीब 1:50 बजे NDRF की टीम ने पीयूष को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बाहर आते ही मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली और तालियों के साथ बचाव दल का स्वागत किया। बच्चे को तुरंत एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी स्वास्थ्य जांच की। शुरुआती जानकारी के अनुसार उसकी हालत सुरक्षित बताई गई।
खुले बोरवेल फिर बने खतरा, सुरक्षा पर उठे सवाल
गया की यह घटना एक बार फिर उन खुले बोरवेल की समस्या को सामने लेकर आई है, जो कई इलाकों में लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं। हर साल देश के अलग-अलग राज्यों से ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां बच्चे खेलते समय खुले या बिना ढके बोरवेल में गिर जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन बोरवेल का इस्तेमाल नहीं हो रहा है, उन्हें पूरी तरह बंद करना और सुरक्षित तरीके से भरना जरूरी है। इसके अलावा निर्माण या खुदाई वाले क्षेत्रों में सुरक्षा घेरा और चेतावनी बोर्ड लगाना भी बेहद आवश्यक है।
प्रशासनिक स्तर पर भी समय-समय पर निर्देश जारी किए जाते हैं कि खुले बोरवेल को खुला न छोड़ा जाए, लेकिन कई जगह इन नियमों का पालन नहीं होता। गया की घटना में प्रशासन और रेस्क्यू टीमों की तेज कार्रवाई से एक मासूम की जान बच गई, लेकिन यह घटना भविष्य के लिए भी एक बड़ा संदेश देती है। यदि खुले बोरवेल समय रहते सुरक्षित नहीं किए गए, तो ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से मांग की है कि इलाके में मौजूद सभी खुले बोरवेल की तुरंत पहचान कर उन्हें सुरक्षित बंद कराया जाए, ताकि किसी और परिवार को ऐसी मुश्किल का सामना न करना पड़े।






