सम्राट चौधरी बने बिहार के नए मुख्यमंत्री, कितना मिलेगा वेतन-भत्ता, क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं, जानिए सबकुछ

15 अप्रैल 2026 की तारीख बिहार के राजनीतिक इतिहास में दर्ज हो गई है, जब लोकभवन में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही सम्राट चौधरी ना सिर्फ कद बड़ा है बल्की उनके वेतन-भत्तों और सुविधाओं में भी बदलाव आया है। आइए जानते हैं मुख्यमंत्री बनने के बाद अब उनकी सैलरी में कितनी वृद्धि होगी और उन्हें कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी।
Samrat Chaudhary

बिहार की सियासत ने आज एक नई करवट ली है। नीतीश कुमार के पद छोड़ने के बाद अब प्रदेश की कमान सम्राट चौधरी के हाथों में आ गई है। 15 अप्रैल 2026 को लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सम्राट चौधरी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसी के साथ सम्राट चौधरी न केवल बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बन गए हैं, बल्कि राज्य के सियासी गलियारों में उनका कद भी सर्वोच्च हो गया है। सत्ता के इस शीर्ष परिवर्तन के साथ ही अब उनके अधिकारों, सुविधाओं और वेतन-भत्तों में भी बड़ा इजाफा हुआ है। आइए देखते हैं कि डिप्टी सीएम की तुलना में अब बतौर मुख्यमंत्री उन्हें कितनी सैलरी मिलेगी और क्या खास सुविधाएं दी जाएंगी….

दरअसल, वर्तमान में बिहार के मुख्यमंत्री को लगभग 40,000 रुपये से 65,000 रुपये के बीच मूल वेतन मिलता है। इसके अलावा ​अपने क्षेत्र के कार्यों के लिए उन्हें करीब 70,000 रुपये प्रति माह का क्षेत्रीय भत्ता और मेहमानों के स्वागत व सत्कार के लिए लगभग 25,000 रुपये से 30,000 रुपये मासिक भत्ता मिलता हैं। सभी भत्तों (DA सहित) को मिलाकर मुख्यमंत्री की कुल मासिक आय लगभग 2.15 लाख रुपये से 2.50 लाख रुपये के बीच होती है। वहीं सरकारी दौरों या विधानसभा सत्र के दौरान उन्हें लगभग 3,500 रुपये प्रतिदिन का दैनिक भत्ता दिया जाता है।

इसके अलावा मुख्यमंत्री आवास, जेड-प्लस (Z+) सुरक्षा कवच, मुफ्त यात्राएं, सरकारी वाहन, मेडिकल सुविधाएं, निजी स्टाफविशेष विमान/हेलीकॉप्टर की सुविधा और एक बड़ा प्रशासनिक अमला मिलता है। सपरिवार देश भ्रमण के लिए यात्रा भत्ता भी मिलता है। परिवार को देश के भीतर किसी भी अस्पताल में निःशुल्क इलाज की सुविधा मिलती है। इसका पूरा खर्च राज्य सरकार उठाती है।

आधिकारिक कामकाज के लिए एक विस्तृत सचिवालय स्टाफ, सचिव, निजी सहायक (PA) और अन्य कर्मचारी नियुक्त किए जाते हैं। आवास और कार्यालय पर फोन, इंटरनेट और संचार के सभी साधनों का खर्च सरकारी खजाने से दिया जाता है। इतना ही नहीं कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें पूर्व विधायक/मंत्री के रूप में नियमानुसार आजीवन पेंशन और चिकित्सा सुविधा मिलती रहती है।

नोट : ये जानकारी विभिन्न माध्यमों से जुटाई गई है, इसमें फेरबदल भी हो सकता है। यह आंकड़े अनुमान के तौर पर दर्शाए गए है। चुंकी आंकड़ों में समय-समय पर कैबिनेट के फैसलों के अनुसार बदलाव होते रहते हैं।

Pooja Khodani
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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
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