मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को पश्चिमी चंपारण जिले के वाल्मीकि नगर में विभिन्न विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण किया और मौके पर मौजूद अधिकारियों को उनके समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री का यह दौरा क्षेत्र में कृषि, सिंचाई और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की सरकार की प्राथमिकता को रेखांकित करता है।

अपने दौरे की शुरुआत में, मुख्यमंत्री ने दोन नहर शाखा सेवा पथ के पुनर्स्थापन कार्य का बारीकी से जायजा लिया। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि यह महत्वपूर्ण कार्य लगभग 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि नहर के तटबंध पर सड़क का पक्कीकरण भी कर दिया गया है, जिससे न केवल रखरखाव आसान होगा, बल्कि आसपास के गांवों के लोगों और किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने में भी काफी सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना के काम को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने इस नहर की उपयोगिता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि यह सिंचाई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके पूरी तरह से चालू हो जाने पर बड़ी संख्या में किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे उनकी कृषि उपज में वृद्धि होगी और क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

नीतीश कुमार ने लव-कुश ईको-टूरिज्म पार्क का किया निरीक्षण

इसके बाद, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गंडक बांध जलाशय के ठीक सामने बन रहे लव-कुश ईको-टूरिज्म पार्क का गहन निरीक्षण किया। जल संसाधन विभाग और पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को साइट प्लान के माध्यम से इस महत्वाकांक्षी परियोजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पार्क पर्यटकों को प्रकृति के करीब लाने और क्षेत्र की जैव विविधता से परिचित कराने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। इस पार्क में विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे, मनोरंजन के साधन और ठहरने की सुविधाएं होंगी, जो पर्यटकों को आकर्षित करेंगी। मुख्यमंत्री ने परियोजना के डिजाइन और भविष्य की संभावनाओं पर भी अधिकारियों से चर्चा की।

नीतीश कुमार ने नवनिर्मित अतिथि भवन का किया निरीक्षण

निरीक्षण के क्रम में, मुख्यमंत्री ने जल संसाधन विभाग के नवनिर्मित अतिथि भवन का भी भ्रमण किया, जो अधिकारियों और पर्यटकों के लिए आरामदायक आवास प्रदान करेगा। उन्होंने वाल्मीकिनगर ईको पार्क का भी दौरा किया, जहां उन्होंने स्थानीय वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण के प्रयासों को देखा। इसके उपरांत, मुख्यमंत्री गंडक बैराज पहुंचे और वहां की मौजूदा स्थिति का विस्तृत जायजा लिया। उन्होंने बैराज के संचालन और जलस्तर प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां लीं और अधिकारियों को पानी के समुचित उपयोग और बाढ़ नियंत्रण के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए।

वाल्मीकि सभागार परिसर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘ईको पर्यटन केन्द्र-वाल्मीकिनगर, प्रमंडल-2, वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष्य’ का शिलान्यास किया। यह केंद्र वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष्य के भीतर ईको-टूरिज्म गतिविधियों को व्यवस्थित करने और बढ़ावा देने के लिए एक नोडल बिंदु के रूप में कार्य करेगा। इसका लक्ष्य पर्यटकों को प्रकृति का सम्मान करते हुए वन्यजीवों और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव कराना है। इसी अवसर पर मुख्यमंत्री ने दो महत्वपूर्ण गिद्ध संरक्षण केंद्रों, जो गोनौली और चिउटाहां में स्थापित किए गए हैं, का भी उद्घाटन किया। इन केंद्रों का उद्देश्य विलुप्तप्राय गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए शोध व प्रजनन कार्यक्रम चलाना है, जो पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री ने जंगल सफारी वाहनों को दिखाई हरी झंडी

कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री ने जंगल सफारी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहनों से अब पर्यटक अधिक सुविधा और सुरक्षा के साथ वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के भीतर जंगल भ्रमण कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इन सुविधाओं से पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों को करीब से देखने का अनूठा अवसर मिलेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वाल्मीकि नगर को एक प्रमुख ईको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे न केवल राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने और बिहार को देश के पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने के लिए लगातार विकास कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि वाल्मीकि नगर का प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवन इसे ईको-टूरिज्म के लिए एक आदर्श स्थान बनाते हैं। सरकार की योजना है कि यहां आने वाले पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलें और वे बिहार की समृद्ध प्राकृतिक विरासत का अनुभव कर सकें। इस पहल से स्थानीय हस्तकला और व्यंजनों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे समग्र आर्थिक विकास को गति मिलेगी।