छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कुनकुरी प्रस्तावित दौरा शुक्रवार को मौसम की गंभीर खराबी के चलते रद्द करना पड़ा। मुख्यमंत्री निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार सुबह हेलिकॉप्टर से जशपुर जिले के कुनकुरी के लिए रवाना होने वाले थे। उनके इस दौरे में कई स्थानीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेने और पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर आगामी रणनीतियों पर चर्चा करने की योजना थी। हालांकि, सुबह से ही जशपुर और आसपास के इलाकों में छाए घने बादल, तेज हवाएं और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां उड़ान के लिए बिल्कुल अनुकूल नहीं थीं।
रायपुर के हेलीपेड पर मुख्यमंत्री साय ने काफी देर तक मौसम साफ होने का इंतजार किया। उनकी सुरक्षा और यात्रा से जुड़े अधिकारियों ने मौसम विभाग से लगातार संपर्क बनाए रखा, लेकिन उन्हें बताया गया कि स्थिति में तत्काल सुधार की कोई उम्मीद नहीं है। हेलिकॉप्टर जैसे संवेदनशील माध्यम से यात्रा के लिए न्यूनतम दृश्यता और स्थिर मौसम का होना अनिवार्य होता है, जो उस समय बिलकुल भी नहीं था। सुरक्षा कारणों और अप्रत्याशित जोखिम से बचने के लिए, अंततः यह फैसला लिया गया कि मुख्यमंत्री का कुनकुरी दौरा फिलहाल स्थगित कर दिया जाए। मुख्यमंत्री साय का यह दौरा रद्द होने से स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं में कुछ निराशा जरूर हुई, जो उनके स्वागत और कार्यक्रमों में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे।
पश्चिम बंगाल की राजनीति पर सीएम साय का बयान
अपने कुनकुरी दौरे के रद्द होने के बावजूद, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर का उपयोग राजनीतिक गलियारों में अपनी बात रखने के लिए किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीति और आगामी चुनावों के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बढ़ती ताकत पर विस्तार से अपनी प्रतिक्रिया दी। यह दर्शाता है कि एक मुख्यमंत्री के रूप में प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ वे राष्ट्रीय राजनीति पर भी अपनी पैनी नजर रखते हैं और पार्टी के एजेंडे को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की स्थिति लगातार मजबूत होती जा रही है। उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राज्य में भाजपा को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। इस दावे के पीछे उन्होंने तर्क दिया कि पार्टी के नामांकन रैलियों और चुनावी सभाओं में उमड़ रही विशाल भीड़ इस बात का स्पष्ट संकेत है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह भीड़ केवल संख्या नहीं, बल्कि मतदाताओं की मानसिकता में आ रहे बदलाव और भाजपा के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। वे मानते हैं कि बंगाल की जनता अब एक मजबूत और स्थिर सरकार चाहती है।
सीएम साय ने टीएमसी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
सीएम साय ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में राज्य में विकास की रफ्तार बेहद धीमी रही है और पश्चिम बंगाल उस गति से प्रगति नहीं कर पाया है, जिसकी उसे आवश्यकता थी। मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर ममता सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने तो बिहार में लालू यादव के दौर के ‘जंगल राज’ को भी पीछे छोड़ दिया है, जो अपने आप में कानून-व्यवस्था और शासन की स्थिति पर एक गंभीर टिप्पणी है। ‘जंगल राज’ शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर अराजकता, अपराध और व्यवस्था के अभाव को इंगित करने के लिए किया जाता है।
विष्णुदेव साय ने पश्चिम बंगाल की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्य में बहन-बेटियां असुरक्षित महसूस कर रही हैं, जिससे समाज में भय का माहौल बना हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने युवा बेरोजगारी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जो राज्य में एक बड़ी समस्या बनी हुई है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र की कई महत्वाकांक्षी और जनहितैषी योजनाओं को जानबूझकर राज्य में लागू नहीं किया है। इन योजनाओं का उद्देश्य गरीबों, किसानों और वंचितों को सीधे लाभ पहुंचाना था, लेकिन राज्य सरकार की नीतियों के कारण वे इन लाभों से वंचित रह गए। यह केंद्र और राज्य सरकार के बीच चल रहे गतिरोध को भी दर्शाता है।
सीएम साय ने किया पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने का दावा
मुख्यमंत्री साय ने अपने बयान के अंत में पूर्ण विश्वास के साथ कहा कि इस बार पश्चिम बंगाल में बदलाव की एक साफ और मजबूत लहर देखने को मिल रही है। उन्होंने दृढ़ता से दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी। उनका यह बयान भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के उस बड़े लक्ष्य का हिस्सा है, जिसके तहत पार्टी पश्चिम बंगाल को अपनी प्रमुख चुनावी रणनीति का केंद्र बनाए हुए है और वहां अपनी राजनीतिक पैठ मजबूत करने का लगातार प्रयास कर रही है। यह दिखाता है कि भाजपा पश्चिम बंगाल को केवल एक राज्य नहीं, बल्कि पूर्वी भारत में अपनी विस्तारवादी योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है।





