बिहार में यातायात चालान की पुरानी व्यवस्था अब पूरी तरह बदलने जा रही है। राज्य पुलिस मुख्यालय के यातायात प्रभाग ने ट्रैफिक नियम प्रवर्तन को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण आधिकारिक निर्देश जारी किया है। इस निर्देश के तहत मैन्युअल चालान की प्रथा को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है।
अपर पुलिस महानिदेशक (यातायात) ने सभी वरीय पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को संबोधित पत्र में स्पष्ट किया है कि राज्य भर के जिलों में कुल 1869 हैंड हेल्ड डिवाइस (HHD) आवंटित किए गए हैं। अब चालान काटने के लिए इन्हीं डिवाइस का उपयोग अनिवार्य होगा।
निम्न रैंक के अधिकारियों पर प्रतिबंध
नए आदेश में सबसे अहम बदलाव यह है कि ‘अवर निरीक्षक’ से कम रैंक के पुलिस पदाधिकारियों को चालान जारी करने का अधिकार नहीं होगा। मुख्यालय को जानकारी मिली थी कि निम्न कोटि के कर्मचारी भी चालान काटने की कार्रवाई कर रहे हैं, जिसके कारण अधिकार क्षेत्र को लेकर स्पष्टता लाना जरूरी हो गया था।
विभाग ने निर्देश दिया है कि केवल अधिकृत पदाधिकारियों द्वारा ही चालान निर्गत किए जाएं ताकि जवाबदेही तय की जा सके और किसी भी प्रकार के विवाद से बचा जा सके।
मोबाइल फोटो पर सख्त रोक
पुलिस मुख्यालय ने उस प्रथा पर भी लगाम कसी है जिसमें पुलिसकर्मी अपने मोबाइल फोन से उल्लंघन की फोटो खींचकर बाद में HHD मशीन में एंट्री करते थे। नए नियमों के तहत यह तरीका अब पूरी तरह वर्जित कर दिया गया है।
विभाग का कहना है कि प्रत्येक चालान में वास्तविक तिथि, समय और Lat-Long (भौगोलिक स्थिति) की स्टैम्पिंग होनी अनिवार्य है। यह सुविधा केवल हैंड हेल्ड डिवाइस के ‘ऑन द स्पॉट’ फोटो फीचर के माध्यम से ही सुनिश्चित की जा सकती है, जो तकनीकी स्तर पर जालसाजी की गुंजाइश खत्म करती है।
तकनीकी फीचर्स को एक्टिवेट रखना अनिवार्य
मुख्यालय के अनुसार सभी आवंटित HHD मशीनों में लोकेशन ट्रैकिंग के लिए Lat-Long और मौके पर फोटो लेने की सुविधा मौजूद है। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इन फीचर्स को हमेशा एक्टिव रखें।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यातायात प्रवर्तन की प्रक्रिया को पूरी तरह साक्ष्य-आधारित बनाना है। भौगोलिक स्थिति और समय की स्वतः अंकित जानकारी से चालान की प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी और किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी।
नियम उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
अपर पुलिस महानिदेशक (यातायात) ने अपने पत्र में स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि यदि कोई पदाधिकारी या कर्मचारी इन निर्देशों की अनदेखी करता है तो उसके खिलाफ विधि-सम्मत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस पहल से राज्य की यातायात व्यवस्था में पारदर्शिता आने की उम्मीद है। आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी से बचाने और उनकी शिकायतों में कमी लाने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।





