
बीते दो दिनों पहले दरभंगा के जाले विधानसभा क्षेत्र में बिहार सरकार के मंत्री जीवेश मिश्रा और एक यूट्यूबर के बीच विवाद सामने आया। यूट्यूबर ने आरोप लगाया कि मंत्री और उनके समर्थकों ने गाली-गलौज और मारपीट की। इस मामले में तेजस्वी यादव ने भी हस्तक्षेप किया और थाने में मंत्री पर एफआईआर दर्ज कराई। वहीं, एक महिला ने तेजस्वी यादव और अन्य चार लोगों पर माई-बहन मान योजना में फॉर्म भरने के नाम पर 200 रुपये लेने का मामला दर्ज कराया। मामला अब जाति राजनीति की तरफ बढ़ता दिख रहा है।
अगड़े और पिछड़े का मसला उभरा
जीवेश मिश्रा भूमिहार जाति से हैं जबकि यूट्यूबर सहनी समाज से हैं। इस कारण विवाद ने अगड़े-पिछड़े की राजनीति का रूप ले लिया। बीजेपी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा का कहना है कि तेजस्वी यादव चुनाव के समय लालू परिवार की परंपरा का पालन करते हैं। वे बताते हैं कि लालू परिवार हमेशा चुनाव में जातिगत भेदभाव का फायदा उठाता रहा है। प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि एफआईआर केवल मामूली घटना को बड़ा दिखाने की कोशिश है और इसे जातीय रंग देने की साजिश है।
आरजेडी की प्रतिक्रिया और राजनीतिक माहौल
आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की और कहा कि तेजस्वी यादव ने सब कुछ स्पष्ट रूप से जनता के सामने रख दिया है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विशेषज्ञ धीरेंद्र कुमार ने बताया कि तेजस्वी यादव लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक और शारीरिक पुत्र हैं। उनका मानना है कि आरजेडी चुनाव के समय में हमेशा ए टू जेड की पार्टी नहीं रहती और चुनाव के समय व्यक्तिगत और जातीय मुद्दों के माध्यम से राजनीतिक फायदे उठाए जाते हैं।
चुनावी साल और भविष्य की राजनीति
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल कैंडिडेट फील्डिंग नहीं हुई है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएगा, घटनाओं को जातिगत और सामाजिक ढांचे में ढालकर राजनीति की जाती रहेगी। दरभंगा विवाद ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में अगड़े-पिछड़े का मुद्दा चुनावी रणनीति का हिस्सा बन सकता है। अब जनता पर यह निर्भर करेगा कि वह इस तरह की राजनीति को स्वीकार करती है या नहीं।
