जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार पर सीधा हमला बोला है। दरअसल शनिवार, 28 मार्च को बांका में उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले विधानसभा चुनाव में नीतीश सरकार ने हर विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों रुपए खर्च कर वोट खरीदे थे। प्रशांत किशोर के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की वह जीत जनता की लोकप्रियता का नतीजा नहीं थी, बल्कि पैसे और चुनाव आयोग की मदद से तैयार किया गया एक ‘मैन्युफैक्चर्ड’ यानी बनावटी परिणाम था।

दअरसल प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं पर भी बेहद तल्ख टिप्पणी की। वहीं उन्होंने साफ कहा कि अगर 202 विधायकों के भारी-भरकम समर्थन के बावजूद नीतीश कुमार को 3 महीने के अंदर ही मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ रहा है, तो यह उनकी चुनावी जीत के पीछे की सच्चाई बताता है। पीके ने आरोप लगाया है कि –

“इस चुनाव में सरकार ने हर विधानसभा क्षेत्र में 60 से 70 करोड़ रुपए खर्च कर वोट खरीदे हैं। 202 विधायकों के भारी-भरकम समर्थन के बावजूद अगर नीतीश कुमार को 3 महीने के अंदर ही मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ रहा है, तो यह साबित करता है कि उनकी जीत जनता की लोकप्रियता की नहीं थी। यह पैसे और चुनाव आयोग की मदद से तैयार किया गया एक ‘मैन्युफैक्चर्ड’ (बनावटी) परिणाम है।”

भविष्य की चुनावी रणनीति पर बड़ा बयान दिया

दरअसल बांका के सर्किट हाउस के पास स्थित होटल मधुवन विहार में जन सुराज के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने ‘बिहार नवनिर्माण अभियान’ के तहत संगठन की मजबूती और भविष्य की चुनावी रणनीति पर बड़ा बयान दिया है। वहीं उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले कुछ महीने बिहार की राजनीति में जन सुराज के विस्तार के लिए निर्णायक साबित होंगे।

जन सुराज का तीन महीने का रोडमैप

वहीं प्रशांत किशोर ने आगामी तीन महीनों, यानी अप्रैल, मई और जून के लिए जन सुराज का विस्तृत रोडमैप पेश किया है। दरअसल उन्होंने बताया कि इस दौरान पूरे राज्य में संगठन को फिर से पुनर्गठित किया जाएगा। यह पुनर्गठन जमीन पर जन सुराज की पकड़ को मजबूत करने और हर स्तर पर कार्यकर्ताओं को तैयार करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

वहीं संगठन के पुनर्गठन के तुरंत बाद, जुलाई महीने से पूरे बिहार में एक बड़े पैमाने पर राज्य स्तरीय जन सुराज सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। दरअसल प्रशांत किशोर ने याद दिलाया कि गांधी भितिहरवा आश्रम में किए गए उपवास के दौरान यह तय हुआ था कि नई सरकार को अपने वादों को पूरा करने के लिए 6 महीने का समय दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब यह समय सीमा पूरी हो चुकी है, और जन सुराज के कार्यकर्ता घर-घर जाकर जनता के बीच अपनी बात रखेंगे और उनके मुद्दों को सामने लाएंगे। यह अभियान सिर्फ सदस्यों को जोड़ने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनता को सीधे तौर पर आंदोलन से जोड़ने का एक माध्यम बनेगा।

प्रशांत किशोर ने बिहार के भविष्य और अगले मुख्यमंत्री को लेकर भी एक नया विवाद छेड़ दिया। उन्होंने साफ कहा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री जो भी बने, उसके लिए प्राथमिकता बिहार का विकास नहीं होगी, बल्कि उसे गुजरात की चिंता ज्यादा सताएगी।