सरकारों में ‘पापा के लाडले’.. बिहार मंत्रिमंडल विस्तार पर रोहिणी आचार्य का तीखा हमला, कहा- इन लोगों की ‘थेथरई’ पर तो हंसी आती है

रोहिणी आचार्य ने बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद JDU-BJP पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने 'जमाई आयोग' और 'थेथरलॉजी' जैसे शब्दों का प्रयोग कर परिवारवाद और पाखंड पर सवाल उठाए।
सरकारों में ‘पापा के लाडले’.. बिहार मंत्रिमंडल विस्तार पर रोहिणी आचार्य का तीखा हमला, कहा- इन लोगों की ‘थेथरई’ पर तो हंसी आती है

बिहार में जब मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ, तो उम्मीद थी कि नए चेहरों को मौका मिलेगा। मिला भी, पर उसके साथ जो सियासत गरमाई, वह भी कम दिलचस्प नहीं। नीतीश कुमार के बेटे निशांत को स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह एक ‘नया चेहरा’ था, जिस पर सबकी नजरें थीं। मंत्रिमंडल के इस विस्तार के बाद बिहार की राजनीति में उबाल आना तय था। आरजेडी प्रमुख लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देने में देर नहीं लगाई। उन्होंने बीजेपी और जेडीयू को सीधे निशाने पर लिया, आरोप लगाया कि ये दल ‘थेथरलॉजी’ में माहिर हैं।

रोहिणी आचार्य ने JDU-BJP पर बोला तीखा हमला

रोहिणी आचार्य ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि जेडीयू और बीजेपी की एक बहुत बड़ी विशेषता है: ‘थेथरलॉजी’ में इनकी महारत। ये अपनी सहूलियत के हिसाब से पल-पल पलटते हैं। इनकी बात पर भरोसा करना मुश्किल है। मिथिला के इलाके में एक कहावत प्रचलित है, “बाजते छी त हारली केना” (जब बोल ही रहे हैं, तो हारे कैसे) – रोहिणी आचार्य के अनुसार, यह कहावत इन पर एकदम सटीक बैठती है। अपनी बात से मुकरना इनकी आदत सी हो गई है, जो अक्सर सार्वजनिक मंचों पर देखने को मिलता है।

परिवारवाद के मुद्दे पर विपक्ष को लगातार घेरने वाले ये दल, अपनी ही जमात के भीतर पनप रहे परिवारवाद को बड़ी आसानी से भूल जाते हैं। रोहिणी आचार्य ने कहा कि ये सिर्फ विपक्ष को परिवारवाद पर बढ़ावा देने का झूठा उलाहना देते हैं। दूसरों पर तोहमतें लगाना इनकी पुरानी आदत है, जबकि खुद अपनी गिरेबां में झांकना इन्हें गवारा नहीं। यह इनकी राजनीति का एक दिलचस्प पहलू है।

रोहिणी ने परिवारवाद को लेकर कसा तंज

उनकी इस ‘थेथरई’ पर तो हंसी आती है, रोहिणी ने तंज कसते हुए कहा। ये खुद ‘जमाई आयोग’ बनाते हैं, इनकी सरकारों में ‘पापा के लाडले’ थोक के भाव में मंत्री पद पाते हैं, पर कुतर्क ये कि परिवारवाद को बढ़ावा तो विपक्ष देता है! यह तर्क किसी के गले नहीं उतरता। जब अपने ही बेटे और रिश्तेदारों को महत्वपूर्ण पदों पर बिठाया जाता है, तब परिवारवाद पर चुप्पी साध ली जाती है। यह दोहरा मापदंड इन्हें खूब रास आता है।

जेडीयू वालों को अपनी थोंथी और बचकानी दलीलों के साथ विपक्ष के भ्रष्टाचार और मुकदमों की बातें करना खूब आता है, रोहिणी आचार्य ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा। लेकिन अपने ही शासनकाल के अंतहीन भ्रष्टाचार और सैकड़ों घोटालों को ये सिरे से भुला देते हैं। यह भी भूल जाते हैं कि जब यही लोग आज के विपक्ष के साथ सत्ता साझा कर रहे थे, तब इनकी ही जमात के बड़े नेता खुले मंच से विपक्षी दल के बड़े चेहरों और उनके परिवार पर थोपे गए मुकदमों को ‘बदले की भावना से थोपे गए झूठे मुकदमे’ करार देते थे। अब वही मुकदमे इन्हें भ्रष्टाचार के प्रतीक लगने लगे हैं, और उन्हीं आरोपों के आधार पर विपक्ष को घेरने में कोई संकोच नहीं। यह राजनीति का कैसा दोहरा मापदंड है, यह सवाल रोहिणी आचार्य ने उठाया।

Ankita Chourdia
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