पटना: लंबे समय से जजों की कमी से जूझ रहे पटना हाईकोर्ट को जल्द ही कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अपनी बैठक में 9 अधिवक्ताओं को पटना हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह कदम हाईकोर्ट में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
कॉलेजियम द्वारा की गई इस सिफारिश के बाद अब इन नामों को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। केंद्र की सहमति के बाद राष्ट्रपति भवन से नियुक्ति की अधिसूचना जारी होगी, जिसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी।
इन 9 अधिवक्ताओं के नामों की हुई सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जिन अधिवक्ताओं के नामों पर मंथन के बाद मुहर लगाई है, उनमें मो. नदीम सेराज, रंजन कुमार झा, कुमार मनीष, और संजीव कुमार शामिल हैं। इसके अलावा गिरिजीश कुमार, आलोक कुमार, राज कुमार, राणा विक्रम सिंह, और विकाश कुमार के नाम भी इस सूची में हैं। इन सभी को न्यायिक अनुभव और योग्यता के आधार पर न्यायाधीश पद के लिए उपयुक्त पाया गया है।
नियुक्तियों के बाद भी खाली रहेंगे कई पद
पटना हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के लिए स्वीकृत पदों की कुल संख्या 53 है, लेकिन वर्तमान में केवल 38 न्यायाधीश ही कार्यरत हैं। चिंता की बात यह है कि इसी वर्ष मुख्य न्यायाधीश एस.के. साहू समेत तीन न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में 9 नए जजों की नियुक्ति के बावजूद हाईकोर्ट में 18 पद खाली रह जाएंगे।
जजों की यह कमी सीधे तौर पर न्यायपालिका के कामकाज को प्रभावित करती है। स्वीकृत संख्या से काफी कम जजों के होने के कारण मामलों की सुनवाई में देरी होती है और लंबित केसों का अंबार लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे न्याय की आस में बैठे लोगों का इंतजार भी लंबा हो जाता है। उम्मीद है कि इन नई नियुक्तियों से कार्य में तेजी आएगी।
क्या है नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया?
कॉलेजियम की सिफारिश प्रक्रिया का पहला चरण है। यहां से अनुशंसित नामों की फाइल केंद्रीय कानून मंत्रालय को भेजी जाती है। मंत्रालय खुफिया ब्यूरो (IB) से इन नामों पर रिपोर्ट मांगता है। पूरी जांच और प्रक्रिया के बाद जब केंद्र सरकार अपनी सहमति दे देती है, तो फाइल को अंतिम मंजूरी और नियुक्ति वारंट जारी करने के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कुछ हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है।






