
बिहार के वैशाली में बने बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप का उद्घाटन जुलाई के अंतिम सप्ताह में किया जाएगा। इस मौके पर चीन, जापान, श्रीलंका, नेपाल, थाईलैंड, तिब्बत, म्यांमार, मलेशिया, वियतनाम, भूटान, कंबोडिया, मंगोलिया, लाओस, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे 15 बौद्ध देशों से भिक्षु वैशाली पहुंचेंगे।
550 करोड़ की लागत, 72 एकड़ में फैला
यह भव्य स्मारक 550.48 करोड़ रुपये की लागत से 72 एकड़ भूमि पर बनाया गया है। इसे वैशाली के पवित्र पुष्करणी तालाब और मड स्तूप के पास विकसित किया गया है। खुदाई में मिले भगवान बुद्ध का अस्थि कलश इसका मुख्य आकर्षण होगा, जिसे संग्रहालय के प्रथम तल पर प्रदर्शित किया जाएगा।
पत्थरों से निर्मित, भूकंपरोधी तकनीक से सुरक्षित
स्मृति स्तूप पूरी तरह पत्थरों से निर्मित है। इसमें राजस्थान के वंशी पहाड़पुर से लाए गए 42,373 बलुआ पत्थर टंग एंड ग्रूव तकनीक से जोड़े गए हैं। इसे आधुनिक भूकंपरोधी तकनीक से तैयार किया गया है ताकि यह हजारों वर्षों तक सुरक्षित रह सके। चारों ओर लिली पोंड, मूर्तियां और बागवानी इसकी सुंदरता को और बढ़ाते हैं।
ध्यान केंद्र से लेकर एम्फीथियेटर तक सब कुछ
परिसर में ध्यान केंद्र, पुस्तकालय, आगंतुक केंद्र, संग्रहालय ब्लॉक, एम्फीथियेटर, कैफेटेरिया, 500 किलोवाट का सौर ऊर्जा संयंत्र, पार्किंग और कई सुविधाएं विकसित की गई हैं। खास आकर्षण है ओडिशा के कलाकारों द्वारा बनाई गई भगवान बुद्ध की भव्य प्रतिमा।
वैश्विक पर्यटन में नई पहचान
यह स्मारक बौद्ध अनुयायियों के लिए आस्था का केंद्र बनेगा और वैशाली को वैश्विक बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान देगा। साथ ही स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा और बिहार के सांस्कृतिक एवं पर्यटन विकास में यह मील का पत्थर साबित होगा।
