4 साल की मासूम की नर्मदा में डूबने से मौत, सर्चिंग के बाद भी नही मिला शव

4 साल की मासूम की नर्मदा में डूबने से मौत, सर्चिंग के बाद भी नही मिला शव

देवास(खातेगांव)।

रविवार दोपहर को नर्मदा नदी(narbda river) के मिर्जापुर स्थित इमली घाट पर 4 वर्षीय बालिका की नर्मदा नदी में डूबने से मौत हो गई। पुलिस(police) एवं गोताखोरों के 8 घंटे से अधिक अथक प्रयास नर्मदा नदी में सर्चिंग के बाद भी बालिका का शव नर्मदा नदी से बरामद नहीं हो पाया है ,शाम होने के कारण शव ढूंढने का काम रोका गया जो आज सुबह से प्रारंभ हुआ!

खातेगांव पुलिस थाने पर पदस्थ एसआई विनय सिंह बघेल (SI Vinay Singh Baghel) एवं एएसआई नारायणलाल चौरडिया (ASI Narayanlal Chowdia) ने मिर्जापुर के इमली घाट से देर शाम लौटने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि ग्राम दुदवास के सुनील रविवार दोपहर को उनकी पत्नी एवं 4 वर्ष की बालिका ईशिका के साथ मिर्जापुर के नर्मदा तट स्थित इमली घाट पर स्नान करने पहुंचे थे! बालिका को स्नान कराने के बाद उसे एक टापू पर खड़ा कर दोनों पति-पत्नी स्नान रहे थे !उसी दौरान उनका ध्यान टापू पर गया तो बच्ची वहा नहीं थी! उन्होंने तत्काल बच्ची के लिए बचाओ बचाओ आवाज लगाई तब आसपास के लोगों ने नर्मदा में कूदकर बच्ची की तलाश की लेकिन वह नहीं मिल पाई, फिर पुलिस को खबर की पुलिस तत्काल मिर्जापुर के इमली घाट पर पहुंचकर गोताखोरों की मदद से बच्चे के शव के लिए सर्चिंग की गई, नर्मदा नदी में लगभग 8 घंटे तक सर्चिंग की लेकिन बालिका का शव बरामद नहीं हो पाया शाम होने के कारण बालिका का शव ढूंढने का काम रोका गया सोमवार सुबह फिर बालिका के शव की तलाश की जाएगी!

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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